सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने किया भाजपा से किनारा

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने किया भाजपा से किनारा

आखिरकार बीच मंजधार में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भाजपा को झटका दे ही दिया। इस पार्टी का उत्तर प्रदेश में आधार है। पिछले विधान सभा चुनावों में पार्टी भाजपा से गठजोड़ कर चुनाव मैदान में उतरी थी। इसके आठ उम्मीदवार चुनाव लड़े, जिसमें से चार जीत गए। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को मंत्री भी बनाया गया। पर राजभर कभी खुश नहीं दिखे। मंत्री रहते हुए भी सरकार की आलोचना करते रहे। यहां तक कि एक डीएम के तबादले को अपनी इज्जत से जोड़ लिया लेकिन उसका तबादला भी नहीं करा सके।

एक लंबे अरसे से राजभर आरोप लगा रहे थे कि भाजपा अहंकार में है और छोटे दलों की उपेक्षा कर रही है। लेकिन उनके आरोपों को पार्टी ने ब्लैक मेलिंग माना। भाजपा की सोच थी कि चूंकि लोक सभा के चुनाव होने वाले हैं, इसलिए सुभासपा ज्यादा सीटें हासिल करने की गरज से दबाव बना रही है। हुआ भी वही। भाजपा ने अपना दल और निषाद पार्टी जैसे दलों को तो महत्व दिया पर सुभासपा को महत्व नहीं दिया। इसलिए ओम प्रकाश राजभर ने चुनावों के बीच अपना रास्ता अलग करने का एलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि पार्टी 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

पार्टी का राज्य में खासकर पूर्वांचल में जनाधार तो है, पर अकेले जीतने की इसकी क्षमता कहीं भी नहीं है। अलबत्ता यह दूसरों को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पिछले लोक सभा चुनावों और 2017 में हुए विधान सभा चुनावों में पार्टी ने भाजपा की जीत में शानदार भूमिका निभाई थी। पूर्वांचल की 128 विधान सभा सीटों में से 122 पर पार्टी का ठीक-ठाक जनाधार है। 2012 के विधान सभा चुनावों में पार्टी राज्य के 152 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसमें किसी भी सीट पर उसे 6000 से कम वोट नहीं मिले थे। जबकि शिवपुर विधान सभा सीट पर पार्टी को 38000, जहूराबाद में 49000, फेफना में 36 हजार वोट मिले थे। करीब दो दर्जन सीटों पर पार्टी को दस हजार से ज्यादा वोट मिले थे। मोटे तौर पर माना जाता है कि ज्यादातर सीटों पर पार्टी के 25 हजार से एक लाख के बीच वोट हैं। 62 सीटों पर पार्टी जीत हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इऩ क्षेत्रों में इसके पास 50 हजार से एक लाख के बीच वोट हैं। जैसा कि मैंने पहले ही कहा पार्टी खुद तो जीतने की स्थिति में नहीं होती, पर दूसरों को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अब जबकि वर्तमान लोकसभा चुनावों में गठबंधन, भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है, सुभासपा के वोट भाजपा के लिए संजीवनी का काम कर सकते थे।