स्कूलों में खादी

स्कूलों में खादी

यूपी के सरकारी स्कूलों में अब बच्चे खादी ड्रेस पहने नजर आएंगे। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस की संभावना तलाशने को कहा था और प्रयोग के तौर पर इस सत्र से इसे शुरू कर दिया गया। मौजूदा सत्र में 4 जिलों के 6 ब्लॉकों के प्राइमरी स्कूलों में पॉयलट प्रॉजेक्ट के तौर पर इसे लागू किया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल हो जाने के बाद अगले साल से इसे पूरे प्रदेश के प्राइमरी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी लागू किया जायेगा। प्रदेश के जिन चार जिलों में इसे लागू किया गया है उनमें लखनऊ, सीतापुर, बहराइच तथा मिर्जापुर शामिल हैं। 

यूपी सरकार स्कूली बच्चों को दो सेट ड्रेस देती है। पहले ये ड्रेस अलग कपड़े की होती थी। अब इसे खादी का देने का प्रयोग किया जा रहा है। निश्चित तौर पर यह प्रयोग अच्छा है। हो सकता है कि देखने में ये ड्रेस उतनी अच्छी न लगे पर इसके जरिए बच्चों में एक विचार भी जाएगा। महात्मा गांधी अपने पूरे जीवन में चरखा कातने और खादी पहनने की सीख देते रहे। उनकी सीख पर बहुत लोगों ने इसे अपनाया और कई लोग तो ऐसे भी सामने आए जिन्होंने जीवन भर खादी के अलावा कुछ और न पहनने का ही ब्रत लिया। गांधी जी चरखा कातने और खादी पहनने को कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानते थे। एक तो इससे लोगों को रोजगार मिलता है और दूसरे यह सादगी का प्रतीक है। इससे लोग मेहनत करने और साधारण जीवन जीने की कला को आत्मसात करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महात्मा गांधी की इस बात को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा था कि आप जो चाहें कपड़ा पहनें लेकिन एक वस्त्र जरूर खादी का अपने साथ रखें। उनकी इस अपील का असर भी हुआ। लोगों ने खादी के कपड़े पहनने शुरू किए और इससे खादी की बिक्री बढ़ गई।

यूपी सरकार के इस फैसले से भी खादी की बिक्री बढ़ेगी और खादी इकाइयों की स्थिति सुधरेगी। इसमें नए लोगों को रोजगार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। निश्चित रूप से यह नजरिया खादी के लिए लाभकारी होगा। योगी सरकार के इस फैसले की सराहना की जानी चाहिए।