राजस्थान विधानसभा में तार - तार हुई संसदीय परम्परा

राजस्थान विधानसभा में तार - तार हुई संसदीय परम्परा

वीरवार को राजस्थान विधान सभा में कुछ ऐसा हुआ,जिसे कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है। खुलेआम विधान सभा की मर्यादा तार तार हुई। आम तौर पर विधान सभा या देश की लोकसभा में जनप्रतिनिधि चर्चा के दौरान कुछ ऐसी हरकतें कर जाते है, जिसकी चहुँओर निंदा होती है ,लेकिन राजस्थान विधान सभा में एक विधायक हनुमान बेनीवाल ने राज्यपाल के साथ जो गुस्ताखी की वो न सिर्फ निंदनीय है बल्कि शर्मसार करने वाली है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब विधायक राज्यपाल को लेकर अनर्गल टिप्पणी कर रहे थे , उस समय उन्हें किसी ने कुछ कहा भी नहीं। बाद में भाजपा के विधायकों ने स्पीकर सीपी जोशी से विधायक के खिलाफ कार्यवाई करने की मांग की लेकिन स्पीकर ने भी चेतावनी देकर मामले को रफादफा करने की कोशिश की।

राजस्थान विधान सभा में वीरवार को राज्यपाल कल्याण सिंह का अभिभाषण होना था। लगभग सभी विधायक सदन में मौजूद थे। अभिभाषण के बाद चर्चा भी होनी थी , लिहाजा सभी विधायक अपनी अपनी तैयारी करके आये थे। चर्चा के दौरान खीवसर के विधायक हनुमान बेनीवाल राजस्थान के किसानों की कुछ समस्यायों को लेकर बोल रहे थे। वो किसानो की मुंग की दाल को लेकर सरकार से उसके मूल्य बढाने की बात कर रहे थे। शायद उनका समय भी समाप्त हो गया था। उसी बीच राज्यपाल कल्याण सिंह का अभिभाषण शुरू हो गया। यह जानते हुए कि सदन में राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा है बावजूद इसके बेनीवाल बोलते रहे , यहाँ तक कि वो अपने चार पांच विधायक साथियों के साथ वेल में पहुँच गए।  उन्होंने सारी परम्पराओं और सदन की मर्यादा को तार तार करते हुए राज्यपाल को ही घेर लिया। जितनी भी वो अमर्यादित और असंसदीय आचरण कर सकते थे , उन्होंने वो सब किया।

हनुमान बेनीवाल की इस हरकत से विपक्ष के सभी विधायक दंग रह गए। उन्होंने उनके खिलाफ नारेबाजी की , स्पीकर से उनके खिलाफ कार्यवाई करने की मांग भी की लेकिन स्पीकर सीपी जोशी ने उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया। साथ ही साथ कहा कि आगे से ऐसी अशोभनीय व्यवहार को कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यानी इतनी बड़ी बात हों जाने के बाद भी स्पीकर को उस विधायक में कोई खामी नहीं दिखी। खैर मामला अब पुराना हो गया है। स्पीकर ने भी चेतावनी देकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर ली है। अब शायद स्पीकर शायद इससे भी किसी बड़ी घटना के होने का इन्तजार कर रहे हैं।

हनुमान बेनीवाल की राजनीती की शुरुवात छात्र यूनियन से हुई थी। वो विधायक बनने से पहले राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रह चुके हैं। छात्र राजनीती से आने वाले बेनीवाल से शिष्टाचार की उम्मीद की जा सकती है क्यों कि ऐसा माना जाता है कि छात्र राजनीती में एक अनुशासन होता है लेकिन बेनीवाल ने अपनी हरकत से यह साबित कर दिया कि वो छात्र राजनीती के नाम पर भी एक कलंक ही हैं।