पुणे में 2000 लोगों को रोजगार देगा सिंगापुर

पुणे में 2000 लोगों को रोजगार देगा सिंगापुर
पुणे में 2000 लोगों को रोजगार देगा सिंगापुर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य के विकास के लिए वे हर कोशिश कर रहे हैं, जिससे राज्य का चतुर्दिक विकास हो सके। इसके लिए वे न सिर्फ केंद्र से ज्यादा से ज्यादा धन लाने की कोशिश करते हैं, बल्कि देश के अलावा विदेशी निवेश से भी राज्य को उत्तरोत्तर प्रगति की राह पर ले जाने की दिशा में प्रयासरत रहते हैं। बीते दिनों सिंगापुर गए, तो वहां भी उन्होंने अपने राज्य में निवेश को गति देने का प्रयास किया। इसका ही नतीजा रहा कि मुंबई में सिंगापुर के वाणिज्य दूत गौविन चाय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसमें प्रतिनिधिमंडल ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही महाराष्ट्र में सिंगापुर एक बड़ा निवेश करेगा। अकेले पुणे में सिंगापुर 80 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इससे दो हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

पुणे में सिंगापुर की विभिन्न कंपनियां हैं। पुणे के मास्टर प्लॉन में इन कंपिनयों की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी। राज्य में तीन से चार सालों में उद्योग और आधारभूत ढांचा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है, इसलिए सिंगापुर की कंपनियां राज्य में निवेश के लिए उत्सुक है। सिंगापुर की कंपनियों के लिए नागपुर का लॉजिस्टिक पार्क और नई मुंबई के एकात्मिक औद्योगिक परिसर में निवेश के लिए अनूकुल वातावरण है। मुख्यमंत्री भी अपने स्तर से सिंगापुर से तालमेल बिठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। बीते 26 सितंबर को मुख्यमंत्री सिंगापुर गए थे, तो उसका रिजल्ट अब जाकर एक बड़े निवेश के रूप में सामने आया है।

हालांकि सिंगापुर दौरे पर जाते वक्त ही मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई थी कि इस दौरे से राज्य को आर्थिक फायदा होगा और यहां निवेश बढ़ेगा तथा नई कंपनियां आएंगी, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। वैसे भी आंकड़ों में देखें, तो मुख्यमंत्री का प्रयास ही रहा कि साल 2016-17 में महाराष्ट्र को 1.20 लाख करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला, जो भारत में हुए कुल एफडीआई का करीब आधा है। इसके बाद विदेशी निवेश लुभाने के लिए मुख्यमंत्री ने दूसरा काम ये किया कि व्यापार को आसान बनाने के लिए कदम उठाया। इसका ही नतीजा है कि वैश्विक समुदाय ने महाराष्ट्र पर भरोसा जताया है। महाराष्ट्र में सरल उद्योग नीति और औद्योगिक विकास के लिए कानून में किए गए बदलाव से राज्य में तेजी से रिकार्ड स्तर पर विदेशी निवेश आया है। तीसरा और महत्वपूर्ण काम सरकार की ओर से ये किया गया कि कौशल विभाग के माध्यम से बड़े पैमाने पर युवाओं को कुशल कारीगर का प्रशिक्षण दिए गए। इसका लाभ सीधे बड़ी कंपनियों को हो रहा है। यहां कारखाने लगाने वाली कंपनियों को प्रशिक्षित श्रमिक मिल रहे हैं।

वास्तव में विदेशी निवेश से एक तरफ जहां राज्य में उद्योग बढ़ रहा हैवहीं दूसरी ओर राज्य में आर्थिक विकास भी हो रहा है। साथ ही साथ शिक्षा लेकर घर बैठे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रयासों का ही नतीजा है कि भारत और खासकर महाराष्ट्र में विकास के अवसर तलाशते हुए चाइनीज कंपनिया तक बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। चीन के बाद अब अगर सिंगापुर ने भी राज्य में निवेश की इच्छा जताई है, तो इसका सारा श्रेय मुख्यमंत्री की कोशिशों को ही जाता है। इससे ये उम्मीद की जा सकती है कि आर्थिक राजधानी जितनी अधिक संपन्न होगी और जितना अधिक यहां निवेश आएगा, उसका सीधा लाभ न केवल राज्य बल्कि समूचे देश के बेरोजगार युवाओं को मिल सकता है।