क्यों मिले सोनिया से राज ठाकरे?

क्यों मिले सोनिया से राज ठाकरे?

कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे से मिलना आम तौर पर पसंद नहीं करतीं। लेकिन इस बार राज ठाकरे दिल्ली आकर उनसे प्रेम से मिले और सोनिया ने कोई एतराज भी नहीं जताया। राज ठाकरे ने सोनिया के आवास दस जनपथ पर जाकर उनसे महाराष्ट्र में होने जा रहे आगामी विधान सभा चुनावों को लेकर चर्चा की। उन्होंने सोनिया को बताया कि महाराष्ट्र के लोगों के मन में संदेह है कि उनका वोट उनके उम्मीदवार को नहीं मिला। उन्हें ईवीएम मशीनों पर शक है। लोग मानते हैं कि ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ की जा सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि उन्होंने सोनिया से ये भी कहा कि अगर मतपत्रों के जरिए चुनाव हो तो बीजेपी वहां किसी भी कीमत पर जीत नहीं सकती।

राज ठाकरे ने लोक सभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी का परोक्ष तौर पर समर्थन किया था। उन्होंने कोई उम्मीदवार तो खड़ा नहीं किया था लेकिन कांग्रेस-एनसीपी उम्मीदवारों के पक्ष में कई जन सभाएं की थीं। शरद पवार ने चुनावों से पहले कांग्रेस नेताओं से राज ठाकरे की एमएनएस को भी अपने साथ लेने की बात की थी। लेकिन कांग्रेस राज के आक्रामक तेवरों और उनके यूपी-बिहार के लोगों के प्रति रुख को देखते हुए उन्हें समझौते में शामिल करने के पक्ष में नहीं दिखी। उसका मानना था कि इससे यूपी-बिहार के लोगों में पार्टी के प्रति नाराजगी बढ़ेगी। लेकिन अब माना जा रहा है कि आगामी विधान सभा चुनावों में मनसे इस गठबंधन का हिस्सा हो सकती है।

राज ठाकरे ने सोनिया से मुलाकात के दौरान कहा कि वो ईवीएम से चुनाव कराने के खिलाफ राज्य में आंदोलन चलाना चाहते हैं। सोनिया ने भी एक तरह से उनकी बात का समर्थन किया। ईवीएम मशीनों को लेकर ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से भी मुलाकात की और उनसे मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने के लिए एक ज्ञापन दिया। लेकिन चुनाव आयुक्त की प्रतिक्रिया से वे निराश दिखाई दिए। बाहर निकलकर उन्होंने कहा कि मैंने तो अपनी ओर से औपचारिकता निभा दी। लेकिन लगता नहीं कि वे इस मुद्दे पर संवेदनशील हैं। वे इस बारे में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं। लेकिन दिल्ली आकर सोनिया से मुलाकात जरूर उनकी एक उपलब्धि रही। क्योंकि इससे पहले सोनिया उनसे मिलने को तैयार नहीं होती थीं। लेकिन लोक सभा चुनावों में पराजय के बाद उनके रुख में बदलाव आया है। फिर ईवीएम को लेकर दोनों की राय भी एक जैसी है। कांग्रेस में सिर्फ सोनिया ही ऐसी थीं जिन्होंने ईवीएम पर साफ शब्दों में संदेह जताया था और इस मामले में लोगों का विश्वास हासिल करने की अपील की थी। उसी बात को राज ठाकरे ने अपने अक्खड़ अंदाज में उठाया है।