कथनी और करनी का फर्क

कथनी और करनी का फर्क

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कड़ा संदेश देते हुए भाजपा नेताओं से कहा कि अक्खड़पन और दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा, ‘‘जो भी हो, वह किसी का भी बेटा हो... इस तरह का अक्खड़पन, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और इस तरह के आचरण में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस बयान को भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजय वर्गीय के विधायक सुपुत्र आकाश विजय वर्गीय की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। आकाश विजय वर्गीय ने इंदौर में एक जर्जर मकान को गिराने गए नगर निगम के कर्मचारियों की क्रिकेट बैट से पिटाई की थी। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि हमें भाजपा में सिखाया जाता है कि पहले आवेदन करो फिर निवेदन करो और उसके बाद दे दनादन करो।

पीएम की इस बात को खूब प्रचारित किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से मीडिया पीएम के हवाले से बहुत कुछ कह रहा है। कहा जा रहा है कि अब आकाश विजय वर्गीय के खिलाफ पार्टी की ओर से कार्रवाई की जाएगी। पीएम के बयान के बाद मध्य प्रदेश भाजपा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है। संभव है पीएम सचमुच इस तरह की घटनाओं से नाराज हों। पर एक बात समझ में नहीं आती कि पीएम की प्रतिक्रिया ऐसे मामलों में इतनी देर से क्यों आती है। आकाश विजय वर्गीय ने जब निगम कर्मचारी की पिटाई की तब उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। आकाश को मीडिया ने जनता का सेवक और अधिकारियों के जुल्म से बचाने वाला बताया तो भी उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। आकाश को जेल भेज दिया गया तो भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। जब कोर्ट के आदेश से छूटे तो उनका ऐसे स्वागत किया गया जैसे कोई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश के लिए जेल से छूटकर आया हो।

इससे पहले चुनावों के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को देशभक्त बताया था। तब किसी ने कुछ नहीं बोला। क्योंकि तब मतदान हो रहे थे और उसका चुनावों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। जब चुनाव बीत गए तब एक इंटरव्यू के दौरान पीएम ने कहा कि कोई भी साध्वी प्रज्ञा को माफ कर दे लेकिन मन से वे कभी उन्हें माफ नहीं कर पाएंगे। सवाल वही है कि अगर साध्वी प्रज्ञा से उनकी इतनी गहरी नाराजगी थी तो उसी समय क्यों नहीं ये बात कही। जब साध्वी ने ये बात कही तो उन्हें भी पार्टी की ओर से एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन अब उस नोटिस का क्या हुआ ये पता नहीं है। इतना ही नहीं साध्वी प्रज्ञा अभी भी बीजेपी की सम्मानित सांसद हैं। बहुत संभव है कि आकाश विजय वर्गीय की नोटिस का भी वही हस्र हो।

सबसे बड़ी बात ये कि क्या यह संभव है कि मोदी जी की इच्छा के खिलाफ कोई सांसद या विधायक कोई काम कर सके। हमें तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता। इसलिए ऐसा लगता है कि मोदी जी का संदेश आम जनता के लिए अलग होता है और अपनी पार्टी और समर्थकों के लिए अलग। साध्वी के बयान पर पीएम ने पहले चुप्पी साधे रखी। इसका मतलब यही था कि हमारे पार्टी के जो कार्यकर्ता या समर्थक ऐसा सोच रहे हैं, इसमें कोई बुराई नहीं है। इसी तरह आकाश विजय वर्गीय ने जब अधिकारी की पिटाई की पार्टी के किसी नेता ने निंदा नहीं की तो उन्हें यही संदेश मिला कि हमारा कहना न मानने वाले अफसरों की धुनाई की जा सकती है। भीड़ की हिंसा को लेकर भी पीएम ने ऐसा ही कुछ संदेश हमेशा दिया। यही संदेश गया कि पार्टी कार्यकर्ता अपना काम करते रहें बाकी लोगों के लिए बाद में दुख जता दिया जाएगा। अभी हाल ही में झारखंड में जिस तरह से एक व्यक्ति को बांधकर मारा गया और बाद में उसकी मौत हो गई। उस पर कई दिन बाद पीएम ने दुख तो जताया पर साथ ही ये भी कहा कि किसी पूरे राज्य को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना भी उचित नहीं है। ये बात उन्होंने इसलिए कही कि इस साल के आखिर तक झारखंड में विधान सभा के चुनाव होने हैं।

पिछले लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में हिंसा ज्यादा हुई। तब बीजेपी ने कहा कि यह हिंसा पश्चिम बंगाल में इसलिए हो रही है क्योंकि वहां ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस हिंसा कर रहे हैं। जबकि भाजपा तो पूरे देश में चुनाव लड़ रही है। और कहीं हिंसा तो नहीं हो रही है। जबकि सचाई इसके विपरीत थी। भाजपा ने जगह-जगह हिंसा फैलाई है। भीड़ की हिंसा में ज्यादातर भाजपा कार्यकर्ता ही शामिल पाए गए हैं। जितने बुद्धिजीवियों की हत्या हुई है, उन सबकी सोच कहीं न कहीं भाजपा से मिलती है। भाजपा ने केरल में हिंसा फैलाई। झारखंड में आपने देखा ही। आकाश विजय वर्गीय की हिंसा को लेकर पीएम को इसलिए भी बयान जारी करना पड़ा है क्योंकि आकाश के पिता कैलाश विजय वर्गीय पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी हैं और उन्हीं की देखरेख में चुनाव लड़ा जा रहा है। इस घटना के बाद ममता बनर्जी कह सकती हैं कि यहां की हिंसा के लिए भी भाजपा वैसे ही जिम्मेदार है जैसे वह मध्य प्रदेश, झारखंड और दूसरे राज्यों में हिंसा करा रही है। इसका असर वहां के विधान सभा चुनावों पर न पड़े इसलिए पीएम को ऐसा बयान जारी करना पड़ा है। पर यह पब्लिक है। सब जानती है।