कई वर्ग भाजपा-कांग्रेस दोनों से हैं नाराज

कई वर्ग भाजपा-कांग्रेस दोनों से हैं नाराज

हिमाचल प्रदेश में भी चुनावों का शोर सुनाई पड़ रहा है। पर मतदाताओं में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा। कई वर्ग तो ऐसे हैं, जो केवल सत्ताधारी दल भाजपा से ही नहीं, बल्कि विपक्षी कांग्रेस से भी नाराज हैं। उनका मानना है कि उनके लिए किसी दल ने कुछ नहीं किया। हिमाचल में लोकसभा की चार सीटें हैं, जिनमें से एक शिमला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

सरकारी कर्मचारी सबसे ज्यादा नाराज हैं। प्रदेश में करीब 80 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। यह वर्ग चुनावों को प्रभावित करने की काफी क्षमता रखता है। कर्मचारी न्यू पेंशन स्कीम लागू करवाना चाहते हैं। विधान सभा चुनावों से पहले भाजपा ने अपने दृष्टिपत्र में इस मुद्दे पर गौर करने का आश्वासन दिया था। लेकिन सवा साल बीत जाने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। वे सत्ताधारी भाजपा से तो नाराज हैं ही कांग्रेस से भी नाराज हैं। क्योंकि कांग्रेस ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस बारे में कुछ नहीं कहा है। कर्मचारियों में आउट सोर्स कर्मचारियों की हालत सबसे बुरी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही इनके लिए उपयुक्त नीति बनाने का आश्वासन दिया, लेकिन किया कुछ नहीं। अब ये आंदोलन की राह पर हैं।

राज्य के दलित भी दोनों ही पार्टियों से नाराज हैं। राज्य में करीब 26 प्रतिशत दलित हैं। तमाम आधुनिकता के बावजूद आज भी उनके साथ भेदभाव किया जाता है। उन्हें दबंगों के जुल्म भी सहने पड़ते हैं। 2018 में सिरमौर में आरटीआई कार्यकर्ता व दलित नेता केदार सिंह जिंदान की हत्या के बाद से तो दलितों में और भी खौफ है। इनका नकारात्मक रुख किसी के लिए भी भारी पड़ सकता है।

राज्य में सैनिक परिवारों की अच्छी खासी तादाद है। यहां करीब ढाई लाख फौजी परिवार हैं। 1.30 पूर्व फौजी हैं तो 1.20 अभी भी कार्यरत हैं। कारगिल की लड़ाई में इस प्रदेश के 52 जाबांज शहीद हुए थे। आजादी के बाद से अब तक करीब 1200 सैनिक युद्ध में शहीद हो चुके हैं। जो सैनिक शहीद हो जाते हैं, उन परिवारों की हालत बिगड़ जाती है। उनके लिए सरकार ने कोई बेहतर नीति नहीं बनाई है। सबसे ज्यादा सैनिक परिवार हमीरपुर और कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में हैं। अर्धसैनिक बलों की संख्या अलग से है। उन्हें तो शहीद का दर्जा भी नहीं दिया जाता। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहां गए थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार आई तो अर्धसैनिक बल के जवानों को भी शहीद का दर्जा दिया जाएगा।

किसानों का भी वही हाल है। कोई भी सरकार आई हो, किसानों की किस्मत नहीं बदलती। भाजपा सरकार ने फरवरी में किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने की मुहिम जरूर छेड़ी। सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना शुरू किया। दस मार्च तक राज्य में छह लाख 95 हजार 246 किसानों ने फार्म भरे। इनमें से चार लाख 37 हजार 190 किसानों के फार्म सही पाए गए। 3 लाख 69 हजार 190 किसानों के खाते में पैसे आ चुके हैं। दो हजार रुपए। ये किसान भाजपा सरकार से खुश हैं। इनका झुकाव भाजपा की ओर हो सकता है। लेकिन जिन किसानों के खाते में पैसे नहीं पहुंचे हैं वे दुखी और गुस्से में भी हैं। संभव है वे भाजपा सरकार पर अपना गुस्सा उतारें।