कांग्रेस सत्ता में आई तो खत्म होगा नीति आयोग

कांग्रेस सत्ता में आई तो खत्म होगा नीति आयोग

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से ऐसे घोषणाएं कर रहे हैं जैसे अगली सरकार उन्हीं की बनने वाली है। पहले उन्होंने घोषणा की कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो 20 प्रतिशत गरीब परिवारों को 72000 रुपए प्रति वर्ष देगी। उनकी आय की न्यूनतम गारंटी करेगी। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की एक सभा में कहा कि अगर कांग्रेस जीती तो नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने राजस्थान में ही घोषणा की कि व्यापारियों को बिना किसी अनुमति के तीन महीने तक व्यापार करने की इजाजत दी जाएगी। इसके बाद व्यापारी अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करेंगे। इसी तरह उन्होंने ये भी घोषणा की कि सरकार में आने पर जीएसटी में उपयोगी बदलाव किया जाएगा। अब उन्होंने घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो योजना आयोग को भंग कर दिया जाएगा।

हरियाणा के करनाल में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हिस्सा लेने पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नीति आयोग पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर इस बार उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आती है, तो वो नीति आयोग को भंग कर देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि नीति आयोग को भंग करने के साथ ही योजना आयोग को बहाल किया जाएगा। इसमें चुनिंदा अर्थशास्त्रियों और 100 से कम स्टाफ को रखा जाएगा। इस घोषणा की मुख्य वजह योजना आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी की न्याय यानी न्यूनतम आय योजना पर सवाल खड़े किये थे। राहुल गांधी के एलान के बाद राजीव कुमार ने कहा था, ‘यह कांग्रेस की पुरानी नीति है। वे चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कह और कर सकते हैं। 1966 में ग़रीबी हटाई गई थी, बाद में वन रैंक वन पेंशन योजना लागू की गई, सभी को शिक्षा के अधिकार के तहत उचित शिक्षा दी गई। इसलिए आप देख सकते हो कि वे कुछ भी कह और कर सकते हैं।राजीव कुमार ने यह भी कहा था, ‘2008 में चिदंबरम वित्तीय घाटे को 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी तक ले गए थे। यह घोषणा उसी पैटर्न पर आगे बढ़ने जैसी है। राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था पर इसके पड़ने वाले प्रभाव की चिंता किए बिना घोषणा कर दी। इस योजना की वजह से हम चार कदम पीछे चले जाएंगे।उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसे लागू करने से वित्तीय घाटा 3.5 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी तक हो सकता है। सभी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां हमारी रेटिंग कम कर सकती हैं। हो सकता है कि हमें बाहर से कर्ज न मिले और हमारा निवेश बंद हो जाए।इससे राहुल गांधी काफी नाराज हुए। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के पास प्रधानमंत्री के लिए मार्केटिंग करने और फर्जी आंकड़े तैयार करने के सिवाय कोई काम नहीं हैं।

वैसे भी कांग्रेस कभी भी नीति आयोग के पक्ष में नहीं रही। ये अलग बात है कि यूपीए के शासन काल में भी एक बार इसे भंग करने की बात चली थी। पर सच तो यह है कि कांग्रेस का इससे भावनात्मक लगाव है। गुजरात के हरिपुरा में 1938 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार योजना आयोग जैसी संस्था का खाका सामने रखा गया था। ब्रिटिश राज में भी 1944 से 1946 तक योजना बोर्ड ने काम किया। भारत के स्वतंत्र होने के बाद मार्च 1950 में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में योजना आयोग की स्थापना की गई थी। पर नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही इसे एक झटके में खत्म कर दिया था। तब कांग्रेस ने इसका विरोध भी किया था। कांग्रेस को इस बात पर एतराज था कि बिना राज्य सरकारों से सलाह-मशविरा किए प्रधानमंत्री ने लाल किले से योजना आयोग को समाप्त करने का एलान कैसे कर दिया। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसके बाद प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर विरोध भी जताया था और कहा था कि ये संघीय ढांचे के खिलाफ है। तब कांग्रेस की ओर से अन्य विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों से भी संपर्क किया गया था। सबने बाद में हुई बैठक में प्रधानमंत्री के इस फैसले का विरोध भी किया था, लेकिन मोदी ने उनकी एक नहीं सुनी।