काम आया कन्हैया कुमार का एक रुपए चंदा लेने का तरीका

काम आया कन्हैया कुमार का एक रुपए चंदा लेने का तरीका

एक रुपए चंदा लेकर 28 घंटे में 28 लाख रुपए का चंदा जुटाने वाले बिहार के बेगुसराय से सीपीआई प्रत्याशी कॉमरेड कन्हैया कुमार का ये तरीका बिल्कुल पहले की चवन्निया मेंबरशिपकी तरह है। इसमें राजनीतिक दल जनता से चंदे के रूप में केवल चवन्नी लेकर पार्टी से जोड़ते थे और पार्टी फंड जुटाते थे। आज महंगाई के दौर में जब चवन्नी चलन में नहीं है, तो हर दल में चंदे की न्यूनतम दर तय है। कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा जैसे दलों को चंदे के रूप में काफी पैसा मिलता है। कम्युनिस्ट पार्टियां भी वोट के साथ चुनाव लड़ने के लिए चंदे में नोट मांगती हैं। अमूमन ये सभी दल चंदा लेकर चुनाव लड़ते हैं और बाद में चंदादाताओं की कई तरीकों से मदद भी करते हैं। यहां तक कि दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल की आम आदर्मी पार्टी (आप) ने भी शुरुआती दौर में खूब चंदा जुटाया था। तब पूर्व कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने आप की स्थापना पर अकेले ही एक करोड़ रुपए का चंदा दिया था।

जहां तक बिहार का सवाल है, तो यहां भी चुनाव में नोट के साथ वोटका फंडा पहले भी कई नेताओं ने आजमाया है। समाजवादी मधु लिमये, जॉर्ज फर्नांन्डिस को भी लोगों ने वोट के साथ नोट दिए थे। चौदहवीं लोकसभा में जॉर्ज फर्नांन्डिस बिहार के मुजफ़्फ़रपुर से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए थे। भले ही इस लोकसभा चुनाव में कन्हैया ने 70 लाख रुपए फंड का लक्ष्य रखा था, पर पूरब के लेनिनग्रेड के नाम से चर्चित और वामपंथ के गढ़ बेगूसराय में 28 लाख रुपए चंदा जुटाकर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने की पूरी तैयारी जरूर कर ली है। वैसे भी साल 1962 के बाद से 2010 तक बेगूसराय सीट सीपीआई के कब्जे में रही है। इस क्षेत्र में भूमिहार जाति का शुरू से दबदबा रहा है। इसी जाति से कन्हैया भी आते हैं। अबकी उनके खिलाफ भाजपा उम्मीदवार गिरिराज सिंह भी भूमिहार हैं और फायर ब्रांड नेता भी हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट पर भाजपा को 39.72, राजद को 34.31 और सीपीआई उम्मीदवार को 17.87 फीसदी वोट मिले थे।

बेगूसराय के विधानसभा क्षेत्र के बीहट कन्हैया कुमार का गांव है। हो सकता है कि भाजपा कन्हैया पर जेएनयू मामले में देशद्रोही होने को आधार बनाए। पर ये ऐसा मुद्दा है, जिसमें आरोपों की अभी न तो पुष्टि हुई है और न ही वे खारिज हुए हैं। हो सकता है कि अगर वो देशद्रोही साबित हुआ, तो उसे कड़ी सजा भी मिले। अगर देशद्रोही न साबित हुआ, तो मुक्ति भी मिल जाए। लेकिन इसके बावजूद हर घंटे एक लाख रुपए के औसत से चंदा जुटाकर उसने ये साबित किया है कि आज भी 28 लाख लोग ऐसे हैं, जो उसके साथ हैं। कन्हैया ने सोशल साइट्स फेसबुक, ट्विटर से अपील की और लोगों ने भारी-भरकम चंदा दे दिया। इन्होंने सिर्फ एक रुपए का चंदा इसलिए दिया है, ताकि वे उसे सांसद बनता देख सकें। ये भी हो सकता है कि कुछ लोगों ने एक रुपए से अधिक का चंदा दिया हो। पर इससे तो कोई इनकार नहीं कर सकता कि जिन्होंने भी चंदा दिया है, वे कन्हैया के समर्थक हैं।