कश्मीर में घर से बाहर नहीं निकल पा रहे नेता

कश्मीर में घर से बाहर नहीं निकल पा रहे नेता

जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार जोर नहीं पकड़ पा रहा। उसकी मुख्य वजह है आतंकवादियों का डर। आतंकवादियों ने चुनाव के बायकाट की चेतावनी दी हुई है। डर के मारे नेता लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे क्योंकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली है। इस बात की शिकायत नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की है।

इन नेताओं का तर्क है कि चुनाव प्रचार का सबको बराबर का अवसर मिलना चाहिए। अब हो ये रहा है कि जिन लोगों के पास सरकारी सुरक्षा है तो प्रचार कर पा रहे हैं, लेकिन जिनकी सुरक्षा छिन गई है, वो घरों में दुबके रहने को मजबूर हैं। क्योंकि आतंकवादी भी घात लगाए बैठे हुए हैं। वैसे भी चुनाव प्रचार उम्मीदवार से ज्यादा उसके नेता और कार्यकर्ता करते हैं।

राज्यपाल शासन लगाए जाने के बाद प्रशासन ने लोगों को दी गई सुरक्षा की समीक्षा की। उस समीक्षा के आधार पर करीब 500 लोगों की सुरक्षा वापस ले ली गई। इन लोगों में सबसे ज्यादा राजनैतिक कार्यकर्ता ही थे। सबसे ज्यादा कांग्रेस से जुड़े लोगों की सुरक्षा हटाई गई। कांग्रेस के 96 नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई। इसी तरह नेशनल कांफ्रेंस के 78, भाजपा के 66 और पीडीपी के 26 नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई। सीपीएम के 13, पीडीएफ (पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट) के सात, अवामी लीग के पांच और पीपुल्स कांफरेंस के दो नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई। बाकी और भी छोटी-छोटी पार्टियों के कई नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है।

अब स्थिति ये है कि जो उमर और महबूबा मुफ्ती जैसे बड़े नेता हैं सिर्फ वही प्रचार कर पा रहे हैं। इन पार्टियों की दिक्कत ये है कि ये भेदभाव का भी आरोप नहीं लगा सकतीं, क्योंकि भाजपा नेताओं की भी सुरक्षा वापस ली गई है। हालांकि ये जरूर कहा जा रहा है कि भाजपा के ज्यादातर उन नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है जो जम्मू में रहते हैं। जबकि जम्मू और श्रीनगर के कानून व्यवस्था की स्थिति में जमीन आसमान का फर्क है। आपको मालूम है कि जम्मू-कश्मीर में सिर्फ लोक सभा के चुनाव हो रहे हैं विधान सभा के नहीं। केंद्र सरकार ने खुद माना है कि वहां कानून व्यवस्था के चलते चुनाव कराने की स्थिति नहीं है। इस पर विपक्षी दलों ने सवाल भी उठाए थे कि अगर कानून व्यवस्था के चलते विधान सभा के चुनाव नहीं कराए जा सकते तो लोक सभा के क्यों कराए जा रहे हैं।