अपनों से ही परेशान हो रही है भाजपा

अपनों से ही परेशान हो रही है भाजपा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष एवं देश के गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली से देश के लोग खुश हैं। लोगों को उम्मीद है कि ये दोनों नेता राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की एक अलग तस्वीर बनायेंगे। दोनों नेता दिन रात इसी प्रयास में लगे हैं कि कैसे लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरा जाए । लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि भाजपा के कुछ सांसद और विधायक ही उनकी राह में रोड़ा अटका रहे हैं । विवादित बयान देने वाले नेताओं की क्लास लगनी शुरू हो गई है, कुछ नेताओं के खिलाफ कार्यवाई भी हुई भी है,लेकिन उसके पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक के एक ब्यान को विपक्षी पार्टियों ने हथियार बना लिया। आलम यह है कि अब राज्यपाल अपने ब्यान पर ही अफ़सोस जता रहे हैं।

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को लद्दाख संभाग के करगिल में एक पर्यटन कार्यक्रम में कहा कि आतंकवादी  निजी सुरक्षा अधिकारियों और विशेष पुलिस अधिकारियों की हत्या क्यों कर रहे हैं।  उन्हें अगर किसी की हत्या करनी ही है तो उन्हें मारें जिन्होंने जम्मू कश्मीर को लूटा है। उन अफसरों और नेताओं को मारें जो भ्रष्ट हैं । राज्यपाल के इस ब्यान के बाद विपक्षियों को बैठे बिठाए बोलने का मौका मिल गया । सबसे पहले ब्यान आया जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला का । एक ट्वीट के जरिये उन्होंने लिखा कि आज के बाद जम्मू कश्मीर में किसी भी नेता, सेवारत या सेवानिवृत अधिकारी की हत्या होती है तो यही समझा जायेगा कि वह हत्या राज्यपाल के आदेश से करवाई गई है । हालांकि मामला आगे बढ़ता देख राज्यपाल ने अपने ब्यान पर सफाई दी ,और कहा कि जम्मू कश्मीर में लगातार बढ़ते हुए भ्रष्टाचार की वजह से हुई हताशा और गुस्से में उन्होंने ऐसा ब्यान दिया था । उन्होंने  यह भी सफाई दी है कि राज्यपाल के रूप में उन्हें ऐसा ब्यान नहीं देना चाहिए था । कांग्रेस ने भी उनके ब्यान की आलोचना की।

भाजपा में कुछ ऐसे नेता हैं जो अपने बयानों से मोदी और अमित शाह को परेशानी में डालते रहते हैं, अभी कुछ दिन पहले उतराखंड के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन का तमंचे के साथ डांस करने का वीडियो वायरल हुआ था । उस वीडियो को देश के करोड़ों लोगों ने देखा। गलती उस विधायक ने की थी लेकिन उंगलियाँ उठ रहीं थीं भाजपा पर । हालांकि भाजपा ने उस मामले को गंभीरता से लिया और विधायक कुंवर प्रणव सिंह को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया।  इंदौर में भाजपा विधायक और पार्टी के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय का निगम अधिकारी को क्रिकेट के बल्ले से पीटने का वीडियो वायरल हुआ था ।  विधायक की उस करतूत के बाद पार्टी की बड़ी किरकिरी हुई थी । उस घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी इतने परेशान हुए कि उन्होंने सांसदों की मीटिंग में यहाँ तक दिया कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मोदी और अमित शाह की पूरी कोशिश यही है कि उनकी पार्टी का सांसद ,विधायक या कोई भी नेता ऐसा व्यवहार न करे जिससे कि पार्टी की छवि खराब हो। हालांकि भाजपा में ऐसे नेताओं की एक लम्बी फेहरिश्त है जो समय- समय पर अपने बयानों से पार्टी की छवि को पलीता लगाने का काम करते रहतें है। लोकसभा चुनाव से पहले संत कबीर नगर के भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी ने अपनी ही पार्टी के विधायक राकेश सिंह पर जूतों की बरसात कर दी थी। पार्टी की काफी छीछालेदर हुई थी ,कुछ समय के लिए ऐसा लगा था कि उन नेताओं की करतूत का खामियाजा भाजपा को कहीं चुनाव में न भुगतना पड़े ,लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता ने मोदी की इमेज के सामने उन नेताओं की करतूत को दरकिनार कर दिया था। हरियाणा  में भी एक एक भाजपा नेता ओ पी धनकड़ ने एक ब्यान देकर पार्टी की किरकिरी करवाई थी। उन्होंने कह दिया था कि अगर हरियाणा के लड़कों की शादी नहीं होगी तो वो बिहार से लड़की लाकर शादी करा देंगे। उनके ब्यान के बाद वहां की विपक्षी पार्टियाँ एकजूट हो गईं थीं । ओ पी धनकड़ के ब्यान ने भाजपा को मुशीबत में ला दिया था । तेलंगना के भाजपा सांसद सोयम बापुराव ने भी अपने उस ब्यान से विपक्षियों को बोलने का मौका दे दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कोई मुस्लिम लड़का किसी आदिवासी लड़की का पीछा करता है तो वो उसका सर काट देंगे ।

देश की कोई भी ऐसी पार्टी नहीं है जिसमे विवादित ब्यान देने वाले नेता न हों। उससे अछूती भाजपा भी नहीं है।  लेकिन भाजपा के बारे में कहा जाता है कि यह चाल, चरित्र और चेहरे वाली पार्टी है ,इसलिए इस पार्टी में विवादित ब्यान देने वाले नेताओं की चर्चा तुरंत शुरू होने लगती है । मोदी और अमित शाह की हमेशा कोशिश यही रहती है कि पार्टी अपने स्लोगन चाल ,चरित्र और चेहरा को सार्थक करे । पार्टी का कोई नेता ऐसा काम न करे जिससे कि उसका स्लोगन झूठा साबित हो और विपक्षियों को बोलने का मौका मिले।  लोकसभ चुनाव से पहले और सरकार बन जाने के बाद भाजपा के कई नेताओं के विवादित ब्यान आने के बाद भी अगर सरकार और भाजपा के प्रति लोगों का विश्वास कायम  है तो यह मान लेने में कोई बुराई नहीं है कि देश सिर्फ और सिर्फ मोदी को देख रहा है न कि उसके नेताओं को । लेकिन पार्टी के बाकी नेताओं को भी सोचना होगा कि जो नेता दिन रात देश की तरक्की में लगा हुआ है उसे अपने उल - जुलूल बयानों से परेशान न किया जाय । सबसे ज्यादा जरुरी है उन लोगों के लिए जो संवैधानिक पदों पर बैठे हैं । लिहाजा जम्मू कश्मीर के राज्यपाल को भी अपने पद की गरिमा को समझने की जरुरत है। क्योंकि बन्दूक से निकली गोली और जुबान से निकली बोली कभी वापस नहीं आती है। भले ही राज्यपाल और भाजपा के अन्य नेताओं ने अपने ब्यान को  अपना निजी ब्यान बताकर माफ़ी मांग ली हो लेकिन देश के लोगों को उनकी मानसिकता का पता तो चल ही जाता है ! ऐसे में देश के लोग प्रत्यक्ष तौर पर भले ही कुछ न बोलें लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर कहना शुरू कर ही देंगे कि देखो सुचिता का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी के नेताओं का चरित्र और उनकी मानसिकता कैसी है।