योजनाओं की घर-घर जाकर देंगे जानकारी

योजनाओं की घर-घर जाकर देंगे जानकारी
योजनाओं की घर-घर जाकर देंगे जानकारी

किसी भी जनकल्याणकारी योजना को जन-जन तक पहुंचाना हर सरकार की कोशिश होती है। इसके पीछे उनकी मंशा होती है कि इस योजनाओं के जरिए वे अपना वोट बैंक पुख्ता कर सकें। ऐसा प्रयास हर दल की सरकार करती रही है। अबकी उत्तर प्रदेश के मिशन-2019 के लिए भाजपा का तरीका अन्य दलों की लीक से थोड़ा हटकर है।

उत्तर प्रदेश में कमल खिलाने के लिए भाजपा अपने मूल आधार सवर्णों के साथ ही अति पिछड़ी जातियों, पिछड़ी जातियों और एससी-एसटी के एक हिस्से को साथ रखने की कोशिश में है। इसके लिए वह जो सोशल इंजीनियरिंगका फॉर्मूला अपनाने जा रही है, उसका लब्बोलुआब यही है कि वह हर जाति का वोट चाहती है। मिशन-2019 के लिए भाजपा 21 नवंबर से 30 नवंबर तक दलित प्रतिनिधि बैठक कर जिस समाज का बड़ा चेहरा होगा, उसे आगे कर अपना आधार मजबूत करेगी। वहीं 26 जनवरी को पार्टी कार्यकर्ता कमल ज्योति लेकर घर-घर पहुंचेंगे और केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजना से लाभान्वित लोगों के घर पर दीपक जलाएंगे। इससे वे उन्हें अहसास कराएंगे कि केंद्र की नरेंद्र मोदी और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें कितनी सहूलियत दी है। इससे उनको काफी लाभ भी मिल रहा है।

एक तरह से यूं कहें, तो भाजपा अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं को वोट के रूप में तब्दील करना चाहती है। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपनी इस रणनीति में कितना सफल होती है, लेकिन सामाजिक नजरिए से देखें, तो अन्य जातियों में पैठ बनाने में भी कदम काफी कारगर हो सकता है। उदाहरणस्वरूप अगर उज्जवला योजना को ही लें, तो आज भी तकरीबन हर जाति के पात्रों के घरों में सरकार की ओर से नि:शुल्क दी गई रसोई गैस पर खाना पक रहा है। ऐसी ही कई योजनाओं का लाभ पात्र उठा रहे हैं। इसने उनकी जिंदगी को काफी आसान बना दी है। भाजपा को उम्मीद है कि यही अहसास चुनाव में वोट के रूप में बदलकर सामने आएगा।

राजनीतिक नजरिए से देखें, तो प्रदेश में हर चौथा मतदाता एससी या एसटी है। हर चुनाव में इसको लेकर ही तकरीबन सभी एंटी भाजपाई दल सत्ता पर पहुंचने की मंशा रखते हैं। ऐसा माना जाता रहा है कि केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सत्ता आने के बाद ये समुदाय उससे नाराज चल रहा है। राम मंदिर मुद्दे समेत कई ऐसे मामले हैं, जिसको लेकर मुसलमान भाजपा से खफा रहे हैं। ऐसे में भाजपा एससी, एसटी मतदाताओं का साथ जरूरी मान रही है। इसके बिना भाजपा उस दमदार तरीके से सत्ता नहीं पा सकती, जो उसने पिछले चुनावों में करिश्मा कर दिखाया था।