बिहार में पेंडुलम हो गए उपेंद्र

बिहार में पेंडुलम हो गए उपेंद्र

रालोसपा मुखिया उपेंद्र कुशवाहा का बिहार से दिल्ली और दिल्ली से बिहार का दौरा खत्म होने का नाम नही ले रहा है। 2014 में एनडीए के घटक रहे उपेंद्र के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में टिकटों का बंटवारा लगभग हो चुका है। भाजपा और जदयू जहां 17,17 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी हैं वहीं रामविलास पासवान ने भी बाकी बची सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति जता दी है।

पिछले एक माह से बिहार में सीटों के बंटवारे पर बात चल रही है। वहां भाजपा, लोसपा और रालोसपा 2014 में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ीं थीं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को जहां तीन सीटों पर जीत मिली थी वहीं रामविलास पासवान की पार्टी से मात्र 6 सांसद बने थे। भाजपा के खाते में 22 सीटें आईं थीं। हालांकि जदयू इस बार साथ है इसलिए उसे ज्यादा सीटें देना भाजपा के लिए फायदेमंद है।

सबको पता है कि बिहार में उपेंद्र कुशवाहा का राजनैतिक कद पासवान और नीतीश से कहीं ज्यादा छोटा है। पासवान और नीतीश इस बात को भली भांति जानते हैं कि उपेंद्र कुछ ज्यादा बनाने या बिगाड़ने की स्थिति में नही हैं लिहाजा उन्हें विशेष तवज्जों देने की आवश्यकता नही है। भाजपा भी जानती है कि उपेंद्र से ज्यादा जरूरत पासवान और नीतीश की है।

उपेंद्र कुशवाहा इस समय केंद्र में मंत्री हैं। उन्हें लगता है कि मंत्री बन जाने भर से उनका कद बढ़ गया है। इसीलिए वो सीटों के बंटवारे में बारगेनिंग कर रहें हैं। उनका मन दोनों तरफ है। उनकी मनोदशा समझकर उनके सांसद और विधायक भी उनसे किनारा कर चुके हैं अगर जल्दी ही कोई निर्णय नही करते तो उनकी हालत ना घर और ना घाट वाली हो जाएगी।