मंजू वर्मा की गिफ्तारी अनसुलझी पहेली

मंजू वर्मा की गिफ्तारी अनसुलझी पहेली
मंजू वर्मा की गिफ्तारी अनसुलझी पहेली

बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरोपों के घेरे में हैं। 2005 से 2010 तक के शासन काल मे अपने कार्यों से सुशासन बाबू की छवि बना चुके नीतीश आज अपनी पूर्व मंत्री को लेकर चारों ओर से घिर गए हैं। मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में फरार चल रहीं मंजू वर्मा की गिरफ्तारी न होने से सुप्रीम कोर्ट भी बिहार सरकार को फटकार लगा चुकी है।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में पूर्व मंत्री के पति चंद्रशेखर वर्मा की गिरफ्तारी के बाद चर्चा शुरू हो गई थी कि मंजू वर्मा की भी जल्द गिरफ्तारी हो जाएगी। इनके खिलाफ भी आर्म एक्ट में मुकदमा दर्ज है।महीनों तक गिरफ्तारी ना होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि क्या मंजू वर्मा को जमीन निगल गई। बिहार सरकार के साथ साथ बिहार पुलिस को भी सुप्रीम कोर्ट ने खूब डांट लगाई।

विपक्षी सरकार पर मंजू वर्मा को बचाने का आरोप लगाते रहे। आज भी मंजू वर्मा की गिरफ्तारी उलझी हुई पहेली जैसी दिख रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और विपक्ष को थोड़ा संतुष्ट करने के लिए बिहार के मझौल कोर्ट से धारा 82,83 के तहत कुर्की करने का आदेश पारित करा लिया गया। लेकिन गिरफ्तारी कब होगी वह यक्ष प्रश्न आज भी बदस्तूर कायम है।

लालू की पार्टी राजद की 15 साल की सरकार को हटाकर नीतीश कुमार 2005 में जब दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उनका अलग रूप देखने को मिला था। लूट, डकैती,  राहजनी और जातिगत लड़ाई में उलझे बिहार को कुछ ही महीनों में पटरी पर ला दिया था। चारों ओर नीतीश की जय जयकार हो रही थी। यहां तक कि जनता ने उन्हें सुशासन बाबू कहना शुरू कर दिया था। बदमाशों के लिए उनका एलान कि वो बिहार छोड़ें, जेल जाएं या फिर ऊपर जाएं का असर साफ देखने को मिलता था। बड़े से बड़े बदमाशों को भी पुलिस ढूंढ निकलती थी। लेकिन आज वही नीतीश और उनकी पुलिस एक आरोपी को नही ढूंढ पा रही है। नीतीश ये नही कह सकते कि उनकी पुलिस नखादा हो गई है। क्योंकि ऐसा कहने से उनकी ही बेज्जती होगी।

अब सवाल फिर वही है कि मंजू वर्मा की गिरफ्तारी क्यों नही हो रही रही है। कुछ महीनों बाद लोकसभा का चुनाव है। कही नीतीश ये तो नही सोच रहे हैं कि मंजू गिरफ्तार होने के बाद कोई ऐसा राज न खोल दें जिससे उनकी पूरी किरकिरी हो जाय और विपक्ष जो उन पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा है उनको नोचना न शुरू कर दे।फिलहाल सुशासन बाबू मंजू वर्मा की गिरफ्तारी न होने से कहीं आप ये समझ रहे हैं कि आप बचे रहेंगे तो ये आपकी सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है। बेहतर है कि एक नेता के चक्कर मे आप अपनी छवि पर दाग न लगवाएं और 2005 से 2010 वाला नीतीश बनकर मंजू वर्मा को सलाखों के पीछे पहुंचाएं।