अचानक अमीर हुए लोगों की जांच कराएगी यूपी सरकार

अचानक अमीर हुए लोगों की जांच कराएगी यूपी सरकार

आपने देखा होगा कि कल तक जिनके पास चलने के लिए एक बाइक तक नहीं थी, कुछ ही दिनों में वे लक्सरी कार पर चलने लगे। आम तौर पर ऐसे लोगों पर सवाल उठते हैं कि आखिर वह अचानक इतना धनी कैसे हो गया? क्या गडा खजाना मिल गया या फिर वह किसी धत्कर्म में तो शामिल नहीं हो गया? यही मामला अब उत्तर प्रदेश में सामने आया है। यहां अचानक धनी हुए उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी है। इसको लेकर लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगा रहे हैं। कोई कह रहा है कि बीते बजट सत्र के दौरान विधानमंडल में ये मामला उठा था, तो कोई इसे टेरर फंडिंग से जोड़कर देख रहा है। कोई इसे आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले राजनीतिक दलों की लोकसभा चुनाव-2019 से पहले नकेल कसने की कवायद बता रहा है। अब असलियत क्या है, ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन ये मुद्दा काफी अहम है।

अहम इसलिए क्योंकि अचानक किसी के पास यूं ही धन नहीं आता। तरीका कोई भी हो, अगर धन सफ़ेद है, तो उसमें काफी वक्त लगता है। हां, कालाधन या टेरर फंडिंग से कुछ लोग जल्द धनि होते देखे गए हैं। गोरखपुर के अलग-अलग इलाकों से यूपी एटीएस ने बीते 24 मार्च को 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद भी एटीएस की रडार पर कई ऐसे सफेदपोश हैं, जिन्होंाने कम समय में अकूत संपत्ति अर्जित की है। संभावना जताई जा रही है कि ऐसे लोगों के तार किसी न किसी माध्येम से पाकिस्ता्न में बैठे आतंकियों के भारत में मौजूद स्लीिपर सेल से जुड़े हुए हों। यहां तक कि अखिलेश सरकार के कई विभागों में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति तक अचानक धनि हुए लोगों में शामिल किए जाते हैं। वे अखिलेश सरकार के सबसे चर्चित मंत्रियों में से एक थे।

साल 2002 में गायत्री प्रजापतिल ने विधायक का चुनाव लड़ने के लिए जो हलफ़नामा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्ति  महज़ कुछ हज़ार रुपए बताई गई थी। राजनीति में आने से पहले वो ठेकेदारी और प्रॉपर्टी डीलिंग जैसे काम किया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे वो समाजवादी पार्टी के संपर्क में आए। खनन मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिलने के बाद कहा गया कि इनकी संपत्ति बेहिसाब बढ़ी। ऐसे ही अनेक मामले सपा और बसपा नेताओं को लेकर सामने आते रहे हैं। हो सकता है कि आर्थिक अपराध शाखा के बहाने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार इन विपक्षियों की भी नकेल कसने की तैयार कर रही हो। देखना दिलचस्प होगा कि सरकार की ये कोशिश कितनी कामयाब होती है और नवधनाढ्यों पर से कितनी कारवाई हो पाती है।