इंडिया-पाकिस्तान के बीच कॉरिडोर

इंडिया-पाकिस्तान के बीच कॉरिडोर
इंडिया-पाकिस्तान के बीच कॉरिडोर

नानक देव गुरुद्वारे से करतार पुर गुरुद्वारे जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मोदी सरकार एक सौगात लेकर आई है। वर्षों से इन दोनों गुरुद्वारों के बीच कॉरिडोर बनाने की मांग को हरी झंडी दिखाकर मोदी सरकार सिक्खों के चेहरों पर ना सिर्फ मुस्कान लाने में सफल हुई है बल्कि इंडिया और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की एक नई इबारत लिखने की शुरुवात भी कर दी है।

भारत के गुरदासपुर में नानक देव जी का गुरुद्वारा है। यहां से लगभग साढ़े चार किलोमीटर की दूरी पर करतारपुर गुरुद्वारा है जो पाकिस्तान में है। सिक्ख समुदाय का ऐसा मानना है कि सिक्ख धर्म के संस्थापक नानक देव जी ने करतारपुर गुरुद्वारे में अपनी अंतिम सांसे ली थीं। सिक्ख धर्म के लिए ये दोनों ही गुरुद्वारे आस्था के केंद्र हैं।

सिक्ख समुदाय के लोग गुरुदासपुर में बने गुरुद्वारे में तो शीश नवा लेते थे लेकिन करतारपुर स्थित गुरुद्वारे का दर्शन नानक देव गुरुद्वारे से दूरबीन के जरिए करते थे। या फिर वहां से लाहौर होकर जाना पड़ता था जो न सिर्फ दूर पड़ता था बल्कि पासपोर्ट और वीजा की समस्या के चलते अधिकांश सिक्ख श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इन्ही दिक्कतों को देखते हुए वर्षों से यह मांग की जा रही थी कि दोनों गुरुद्वारों के बीच एक कॉरिडोर का निर्माण कर दिया जाय।

1999 में अटल विहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान सरकार से कॉरिडोर बनवाने की मांग की थी लेकिन बात बन नही पाई थी। 2004 में इंडिया और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की वार्ता में भी इस मसले का समाधान नही निकला। उस समय पाकिस्तान ने ही सहमति देने से मना कर दिया था। 2014 में जब अरुण जेटली रक्षामंत्री बने तो डेरा बाबा नानक स्थित आर्मी कैम्प का दौरा किया था। उन्होंने उस समय आस्वासन भी दिया था उनकी सरकार जरूर इस दिशा में कोई कदम उठाएगी।

करतारपुर गुरद्वारे का महत्व इस बात से पता चलता है कि बाबा नानक देव ने यहीं से "किरत करो, जपो और वंड छको"का संदेश पूरी दुनिया को दिया था। सिक्खों की इस मुराद को आखिकार पूरा होते बहूत जल्द देखा जा सकता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी सहमति दे दी है। अपने हिस्से का कॉरिडोर बनाने की शुरुवात इमरान खान 28 नवम्बर कर देंगे।

दोनो देश अपने अपने हिस्से का कॉरिडोर बनवाएंगे। नानक देव की 550 वीं जयंती पर इस कॉरिडोर को खोलने की योजना पर मुहर लग चुकी है। सिक्ख श्रद्धालु अब बिना पासपोर्ट और वीजा के करतारपुर गुरुद्वारे का ना सिर्फ दर्शन कर पाएंगे बल्कि पाकिस्तान में बने लगभग 250 गुरुद्वारों में जाने वाले सिक्ख श्रद्धालुओं से मिलने का अवसर भी प्राप्त हो जाएगा।