शाखा लगेगी, दम हो तो कांग्रेस रोक ले-शिवराज

शाखा लगेगी, दम हो तो कांग्रेस रोक ले-शिवराज

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के घोषणा पत्र पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि अगर वह सत्ता में आई तो संघ की शाखाएं सरकारी भवनों में नहीं चलने देगी और कर्मचारियों को भी उसमें जाने की इजाजत नहीं देगी। इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा मुद्दा बना दिया है। उन्होंने कहा है कि संघ की शाखाएं सरकारी भवनों में लगेंगी। कांग्रेस में दम है तो शाखाएं बंद कराकर देख ले। लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य सचेतक और हिमाचल प्रदेश से सांसद अनुराग ठाकुर ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी के पूर्वज जब संघ पर पाबंदी नहीं लगा सके तो राहुल गांधी और कमलनाथ इस पर पाबंदी क्या लगा पाएंगे। ऐन चुनाव के बीच इस मुद्दे ने इतना जोर पकड़ लिया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस चुनावों की कमान संभाल रहे कमलनाथ को सफाई देनी पड़ी है। उनका कहना है कि घोषणा पत्र में संघ की शाखाओं को लेकर ऐसी कोई बात नहीं कही गई है। उनकी पार्टी का संघ की शाखाओं पर पाबंदी लगाने का कोई इरादा नहीं है। कर्मचारियों के राजनीतिकरण भी वे कुछ नहीं कहेंगे। ये राज्य की जनता खुद देख रही है और वो ही तय करेगी कि कर्मचारियों को संघ की शाखाओं में जाना चाहिए कि नहीं। यह भी कि संघ एक सामाजिक संगठन है या राजनीतिक। घोषणा पत्र में ये कहा गया है कि संघ की कई शाखाएं आदिवासियों के स्कूलों और परिसरों में लगती हैं और इससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होता है।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी काफी पहले से आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी है और इसीलिए वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर पाबंदी लगाने की फिराक में रहती है। आपको मालूम होगा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर पाबंदी लगा दी गई थी। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री वल्लभ भाई पटेल थे और उन्होंने ही संघ पर पाबंदी लगाई थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पटेल के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा गुजरात में लगाई गई है। भाजपा और संघ का कहना है कि पटेल तो संघ के कार्यों के प्रशंसक थे। वे उस समय भी संघ पर पाबंदी नहीं लगाना चाहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें पाबंदी लगाने को मजबूर किया था। उसके बाद से ही संघ-भाजपा और कांग्रेस के बीच 36 के आंकड़े हैं। बहरहाल मध्य प्रदेश में इस चुनाव में भी सत्ता के लिए चौथी बार संघर्ष कर रही भाजपा को बैठे-बिठाए कांग्रेस ने एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। कहने की जरूरत नहीं कि भाजपा इसका पूरा लाभ उठाने की कोशिश करेगी और कर रही है।