सांसद से अभ्रद्ता आप की असभ्यता की निशानी

सांसद से अभ्रद्ता आप की असभ्यता की निशानी

दिल्ली के यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज की ओपनिंग को लेकर जो ड्रामा हुआ उसे कहीं से भी जायज नही ठहराया जा सकता है। लगभग चौदह साल बाद इस ब्रिज की ओपनिंग करने पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में उनके एक विधायक और उनके समर्थकों ने स्थानीय सांसद मनोज तिवारी के साथ जो अभद्रता की वो न सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ थी बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता को भी शर्मसार करने वाली थी।

दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज वाकई देखने लायक़ है। इसकी बनावट ऐसी है कि आने वाले समय मे टूरिस्टों के लिए यह ब्रिज भी आकर्षण का केंद्र होगा। हालांकि जिस ब्रिज की ओपनिंग कर अरविंद केजरीवाल अपनी पीठ थपथपा रहे हैं उसका कुछ श्रेय कांग्रेस को भी जाता है। 2007 में दिल्ली की तत्कालीन शीला दीक्षित की सरकार ने इस ब्रिज की मंजूरी दी थी। कामनवेल्थ गेम्स जो कि 2010 में दिल्ली में होना था, उसके पहले ही सिग्नेचर ब्रिज बनकर तैयार होना था। उस तय समय में ब्रिज नही बन पाया। दूसरी डेड लाइन 2015 की गई पर वह डेड लाइन भी खाली चली गई।

इस बीच दिल्ली में राजनैतिक हालात तेजी से बदले। राजनीति में नई नई पैदा हुई आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। इस बीच सिग्नेचर ब्रिज भी बनकर तैयार हो गया। लगभग 14 साल बाद 1518.7 करोड़ की लागत से यह ब्रिज बनकर तैयार हो गया। रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष शिशोदिया ने ब्रिज का उद्घाटन भी कर दिया लेकिन असली लड़ाई यहाँ देखने को मिली जब भाजपा के उत्तरी-पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के सांसद मनोज तिवारी को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ने  धक्का देकर मंच से गिराने की कोशिश की।

माना कि दिल्ली सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल हैं पर उन्हें या उनके विधायकों को नही भूलना चाहिए था कि मनोज तिवारी भी कोई साधारण आदमी नही हैं। वो भी जनता द्वारा चुने गए एक सम्मानित सांसद हैं। अपने क्षेत्र की जनता के प्रति उनकी भी कुछ जवाबदेही और जिम्मेदारियां हैं। दिल्ली सरकार के तरफ से मनोज तिवारी को कोई निमंत्रण नही गया था लेकिन स्थानीय सांसद होने के नाते वहां जाना उन्होंने अपना फर्ज समझा। वो वहां गए लेकिन आप के लोगों ने जो अभद्रता की उसे मनोज तिवारी क्या,कोई भी बर्दाश्त नही करता।

इतनी बदतमीजी होने के बावजूद मनोज तिवारी के समर्थकों ने अपना आपा नही खोया। वहां हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते थे लेकिन अगर ऐसा नही हुआ तो कहीं न कहीं मनोज तिवारी और उनके समर्थक  बधाई के पात्र हैं।

अरविंद केजरीवाल इस घटना को रोक सकते थे। आम आदमी पार्टी ने सबसे बड़ी गलती मनोज तिवारी को न बुलाकर की। मनोज तिवारी जब पहुंचे और उन्हें धक्का देकर मंच से उतारना उनकी दूसरी गलती थी। अरविंद केजरीवाल उन्हें मंच पर बुला सकते थे। उन्होंने या सबने देखा होगा कि किसी कार्यक्रम में बिना बुलाये भी कोई व्यक्ति पहुंच जाता है तो लोग उसका सम्मान करते हैं ना कि उसकी बेज्जती करते हैं। अगर आप नेता ऐसा करते तो निश्चित तौर पर दिल्ली की जनता के बीच एक अच्छा संदेश जाता। लेकिन केजरीवाल और उनके विधायकों ने जो किया वो बताने के लिए पर्याप्त है कि आप भले ही सरकार चला रही हो पर उसे संस्कृति और सभ्यता सीखने की बहूत जरूरत है।