काशी विश्वनाथ के सौंदर्यीकरण का संकल्प

काशी विश्वनाथ के सौंदर्यीकरण का संकल्प

यूं तो देश भर में शिव के करोड़ों शिवालय हैं, लेकिन उनमें 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। उसमें भी काशी विश्वनाथ का विशेष महत्व है। क्योंकि काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है। इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे।

पर काशी का विश्वनाथ मंदिर उतना आकर्षक नहीं है, जितना और कई जगहों का है। समुद्र के किनारे बना सोमनाथ का मंदिर तो अद्वितीय है। इसी तरह केदारनाथ का मंदिर भी बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बहुत ही आकर्षक है। लेकिन मंदिर के तौर पर देखें तो काशी विश्वनाथ मंदिर उतना आकर्षक नहीं है। पर वहां के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस मंदिर को भी आकर्षक बनाने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने मंदिर परिसर को आकर्षक बनाने की परियोजना का शिलान्यास भी कर दिया है।

काशी विश्नाथ मंदिर वाराणसी में गंगा के दशाश्वमेध घाट के करीब है। लोग गंगा में स्नान करके सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचते हैं और थोड़ी दूर चलने पर दाईं ओर मुड़कर एक संकरी गली में प्रवेश करते हैं और फिर जाकर काशी विश्वनाथ के दर्शन करते हैं। पर अब उन्हें उस संकरी गली से छुटकारा मिल जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी सरकार ने उस गली को सड़क में बदलने और काशी विश्वनाथ परिसर को और खूबसूरत बनाने का संकल्प लिया है। सरकार ने गली के दोनों तरफ बनी दुकानों और मकानों को खरीद लिया है। कुल 296 आवासीय/व्यावसायिक/न्यास से जुड़े भवन हैं, जिनमें से अब तक 238 भवन खरीदे जा चुके हैं और इनको ध्वस्त भी किया जा चुका है। भवनों के ध्वस्तीकरण के दौरान विभिन्न भवनों के अंदर 41 अतिप्राचीन मंदिर पाए गए हैं। अब ये सभी मंदिर काशी की प्राचीन धरोहर हैं। अब इन मंदिरों को काशी विश्वनाथ परिसर में फिर से स्थापित किया जाएगा।

परियोजना में मंदिर प्रांगण का विस्तार कर इसमें विशाल द्वार लगाया जाएगा। साथ ही एक मंदिर चौक का निर्माण किया जाएगा, जिसके दोनों तरफ़ विभिन्न भवन जैसे कि विश्रामालय, संग्रहालय, वैदिक केंद्र, वाचनालय, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र, व्यावसायिक केंद्र, पुलिस एवं प्रशासनिक भवन, वृद्ध एवं दिव्यांग हेतु एलीवेटर एवं मोक्ष भवन इत्यादि निर्मित किए जाएंगे। इस परिसर को इस तरह से विकसित किया जा रहा है कि बाबा विश्वनाथ सीधे गंगा से जुड़ जाएं। अभी तक गंगा में उतरने के लिए काफी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जाहिर है मंदिर के दर्शन के लिए इतनी ही सीढ़ियां चढ़नी भी पड़ती हैं। ऐसे में कमजोर और बुजर्ग लोगों का दर्शन करना मुश्किल हो जाता है। अब कोशिश की जा रही है कि गंगा से ही एलिवेटर बनाया जाए ताकि ऐसे लोग भी आसानी से गंगा में स्नान करके भोले बाबा के दर्शन कर सकें।