मंत्री मंजू वर्मा की करीबी भारी पड़ रही

मंत्री मंजू वर्मा की करीबी भारी पड़ रही
मंत्री मंजू वर्मा की करीबी भारी पड़ रही

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य में सुशासन बाबू कहा जाता था। उनकी छवि एक साफ-सुथरे मुख्यमंत्री की थी। दो बार उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने। यह तीसरा मौका है जब वे भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं।

आपको पता है कि बिहार में एक लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल का शासन रहा। एक दौर ऐसा भी था कि राजद के नेता लालू प्रसाद यादव की तूती बोलती थी। सफलताओं ने लालू के दिमाग में अहंकार भर दिया। उन्हें लगने लगा कि सारे नेता उन्हीं की बदौलत चुनाव जीतते हैं। नतीजा ये निकला कि वे मनमानी करने लगे। पुराने साथियों का अपमान भी करने लगे। ऐसे में बहुत सारे लोग उनसे नाराज हुए और अलग होने लगे। उन्हीं लोगों में नीतीश कुमार भी थे।

पर सचमुच तब तक लालू का जनाधार बड़ा था। इन लोगों के अलग होने के बावजूद हुए चुनाव में लालू ने जीत हासिल की। इसके बाद बिहार की राजनीति में बदलाव आया। लालू चारा घोटाले में फंस गए। दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने लालू को पटखनी देने के लिए भाजपा से हाथ मिला लिया। अगले चुनाव में पटखनी देने में सफल भी हो गए। उस दौर में उन्होंने शानदार सुशासन का नमूना पेश किया। तभी से उनका नाम सुशासन बाबू पड़ गया। दूसरी बार भी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद नरेंद्र मोदी से उनका टकराव बढ़ गया। वे भाजपा से अलग होकर एक बार फिर लालू के साथ जुड़े। फिर जीत हुई और फिर मुख्यमंत्री बने। पर लालू के दबाव में कानून व्यवस्था चरमराने लगी। नीतीश ने अपनी छवि बचाने के लिए फिर लालू का साथ छोड़ा और भाजपा की मदद से सरकार चला रहे हैं। पर इस बार वह सुशासन गायब है। समझ नहीं आ रहा कि उन्हें क्या हो गया। लगता है कि लालू के संपर्क में जाने का इतना असर हुआ है कि सुशासन और तेवर दोनों ही भूल गए हैं।

उनके इसी शासन काल में आश्रय गृहों में लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार और शारीरिक शोषण हुआ। इस मामले में उनकी एक मंत्री मंजू वर्मा के पति फंसे पाए गए। इसके बाद उन मामलों की जांच हुई। टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज ने जांच की रिपोर्ट हाल में सरकार को सौंपी थी और बताया था कि सभी 16 आश्रयगृहों में लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार और शारिरिक शोषण के मामले सामने आए हैं। इस मुद्दे पर बार-बार सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार को लताड़ लगा रही है। पिछले कई महीनों से मंत्री मंजू वर्मा फरार थीं और सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। जब सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई तब जाकर मंजू वर्मा ने सरेंडर किया। तब भी कहा गया कि राज्य सरकार की मिलीभगत से ही मंजू वर्मा फरार थीं। वरना राज्य सरकार चाहे और गिरफ्तारी न हो। कहा जा रहा था कि मंजू वर्मा नीतीश की करीबी हैं, इसीलिए पुलिस सुस्त है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को सीबीआई जांच को सौंप दिया है। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बहुत तर्क दिया कि ऐसा करने से राज्य सरकार की छवि खराब होगी। पर सुप्रीम कोर्ट ने एक नहीं सुनी। कहा, आपको पहले ही ठीक ढंग से काम करना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट एक मामले में पहले से ही जांच कर रही थी, लिहाजा कोर्ट का आदेश मिलते ही उसने इस पूरे काम की जांच अपने हाथ में ले लिया। कोर्ट को यह भी आश्वासन दिया कि सात दिसंबर तक आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। कुल मिलाकर लगता है कि सुशासन बाबू का मनोबल गिर गया है। इसका असर उनके काम पर पड़ रहा है। इससे उनकी छवि तो खराब हो ही रही है, साथ में भाजपा की छवि भी गिर रही है।