आवास के लिए कर्ज देने में महाराष्ट्र अव्वल

आवास के लिए कर्ज देने में महाराष्ट्र अव्वल

हम सभी अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर किसी न किसी रूप में कर्ज जरूर लेते हैं। ये सगे-संबंधियों, दोस्तों से लिया जाए या फिर बैंक आदि संस्थाओं से। यही कर्ज जब लग्जरी आइटम आदि पर खर्च किया जाता, तो ये नुकसानदेह होता है। क्योंकि इसमें एक बार धन लगने के बाद इससे कोई फायदा नहीं होता और इसको बेचने पर इन्वेस्ट धन भी पूरा वापस नहीं मिलता। इसके विपरीत अगर कर्ज प्रॉपर्टी या स्थायी संपत्ति के लिए लिया जाए, तो ये नुकसानदेह के बजाय हमेशा ही फायदे वाला होता है। प्रॉपर्टी की कीमत हमेशा बढ़ती ही रहती है। यही वजह है कि आवास ऋण लेने के लिए लोग खूब दौड़-भाग करते हैं और इसके लिए भारी भीड़ भी रहती है। अब बात अगर महाराष्ट्र की करें, तो कर्ज से जुड़ी जानकारी देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्कने अपनी हालिया जारी रिपोर्ट में ये दावा किया है उससे इसकी पुष्टि होती है कि लोग यहां स्थाई संपत्ति खरीदने में ज्यादा विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि पूरे देश भर में आवास ऋण लेने में महाराष्ट्र के लोग अव्वल हैं।

वैसे भी लोगों को आवास देने की दिशा में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार की ओर से कई आवास योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन सबके बीच अगर लोग बैंकों से कर्ज लेकर आवास बनाने में पूरे देश में आगे हैं, तो इसमें दो स्थितियां हो सकती हैं। या तो यहां के लोग सरकारी आवास पाने की पात्रता नहीं रखते हों और दूसरी यहां के लोग सरकार से आवास लेने की बजाय खुद कर्ज लेकर मकान बनाने में ज्यादा इत्तेफाक रखते हैं। लोग ये भी मानते हैं कि आज जो वे धन आवास में इन्वेस्ट कर रहे हैं, अगर भविष्य में धन की जरूरत हुई, तो ये फायदा देकर ही जाएगा। जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2018 तक बांटे गए कुल आवास ऋण में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है। इसमें भी मुंबई के साथ ठाणे और पुणे में आवास ऋण की मांग सबसे ज्यादा है। कुल मिलाकर आवास ऋण लेने के मामले में ये तीनों शहर बेंगलुरु के साथ देशभर में शीर्ष पर है।

वैसे भी महाराष्ट्र के जिन इलाकों के लोग सबसे ज्यादा कर्ज लेने में आगे हैं, ये इलाके वैसे भी महंगे माने जाते हैं। खासकर मुंबई में तो संपत्ति की कीमतें और किराए की दरें बेहद उच्च हैं। यहां लिविंग स्पेस बेहद भीड़भाड़ वाला है। मुंबई में एक टू बीएचके की कीमत भी औसत 1.03 करोड़ रुपए के करीब होती है। ऐसे में अगर वे भविष्य में वे इसे बेचना भी चाहेंगे, तो ये अच्छी कीमत देकर जाएगा। ये एक तरह से ऐसी स्थाई संपत्ति है, जिसमें धन लगाने पर आगे हमेशा फायदा ही होता है। आवास ऋण श्रेणी में पिछले साल के मुकाबले 16.8 प्रतिशत की वृद्धि और कुल 17,900 अरब रुपए का कर्ज वितरण ये बताने के लिए पर्याप्त है कि लोगों में अपने आवास के लिए बैंकों आदि संस्थाओं से कर्ज लेने में तनिक भी हिचक नहीं है। खासकर मुंबई जैसी जगह पर अपना आवास पाना किसी सपने से कम नहीं होता। ऐसे में अगर आवास ऋण लेने के मामले में महाराष्ट्र जैसा राज्य शीर्ष पर है, तो ये एक बड़ी बात है।