दक्षिण कश्मीर में स्थानीय चुनाव भाजपा के लिए छौंक

दक्षिण कश्मीर में स्थानीय चुनाव भाजपा के लिए छौंक

दक्षिण कश्मीर के चार जिलों के स्थानीय निकाय चुनावों में बाजी मार कर भाजपा ने प्रदर्शित कर दिया है कि उसने उग्रवाद प्रभावित इन जिलों की आवाम का दिल जीत लिया है। तात्पर्य है कि कश्मीर के मतदाताओं की दृष्टि में पार्टी की छवि बेहतर हुई है। इस चुनावी निष्कर्ष में एक सामान्य मतदाता ने समझा है कि भाजपा की सियासत राष्ट्रीय फलक वाली तो है ही, धुर उत्तर का जम्मू-कश्मीर राज्य भी पार्टी के लिए राष्ट्रीय महत्व का है, बल्कि पार्टी जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय पैमाने पर कसते हुए उसी के अनुसार कार्यक्रम तैयार करने की भी तैयारी में है।

कश्मीर के स्थानीय चुनाव की फिजा में इस बार राज्य या स्थानीय चुनावी चहक नहीं, सुरक्षा, प्रगति और शांति के मुद्दे हावी दिख रहे थे, यानी इस बार केंद्र और राज्य में मोदी के राजनीतिक ककहरे के मजबूत पक्ष में बयार बह रही है। दक्षिण कश्मीर में भाजपा की जीत यही बताती है कि यदि दृष्टिकोण व्यापक हो और जन सरोकार में ईमानदारी हो, तो लोगों के बीच स्वयं को साबित करने की आवश्यकता नहीं होती।

लगभग बीस साल पहले राज्य में जम्मू के बाकी उत्तरी क्षेत्रों में भाजपा को कोई पूछता तक नहीं था, लेकिन आज यह सिलसिला टूटा है। वैसे भी आज के स्थानीय निकाय के ताजे चुनाव परिणामों में भाजपा के राज्य स्तर पर भविष्य की राजनीति के प्रबल होने की गहरी लकीरें भी नमूदार होती दिख रही हैं, जिनका भविष्य उजला है।

लेकिन, जिन्हें कभी भाजपा से कथित नजदीकियों में थोड़ी भी हिचक रहती दिखती थी, वे भी अब अंतर्समीक्षा करके भाजपा के पक्ष में खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस सहित नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी को भी अपने राजनीतिक जन सरोकारों की ईमानदारी से पड़ताल करने की आवश्यकता अब होनी चाहिए, बल्कि आज के नतीजों के आलोक में ये दल अब खुद का मूल्यांकन कर भी रहे होंगे। भाजपा ने 132 वार्डों में से 53 में जीत दर्ज कर कश्मीर में आतंकवाद पर सीधी और गहरी चोट भी की है, इसलिए जम्मू-कश्मीर में सीमापार से आतंक की नयी खेप पर चोट के लिए अब मजबूत भूमि तैयार है। लगता है, भाजपा की आज की जीत में मोदी का राजनीतिक मसाला भी काम कर रहा है। ‘स्थानीय चुनाव तो महज छौंक’ लग रहे हैं। इसी के सहारे आम कश्मीरी राज्य में विकास की आंधी आते देखने को उतावले हैं।