राजस्थान में मंत्री की जातिवादी सोच से किसी का भला नहीं होगा

राजस्थान में मंत्री की जातिवादी सोच से किसी का भला नहीं होगा

राजस्थान में नयी-नवेली बनी कांग्रेस सरकार  की महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश का जबरदस्त बयान नमूदार हुआ है। वे अलवर के रैणी कस्बे में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों से कह रही हैं कि हमारा पहला काम हमारी जाति के लिए होगा। वे कह रही हैं कि उनका प्रथम कार्य उनकी जाति के लिए, उसके बाद उनके समाज के लिए, उसके बाद सर्व समाज के लिए, सबके लिए काम करना है। सियासत में ऐसी मानसिकता के लोग जब लोक भावना को दिखावे के रूप में आगे रख कर आएंगे, तो पार्टी अध्यक्ष राहुल जी इन्हें भला कैसे समझा पाएंगे। ममता ने  अपनी प्रथम प्राथमिकता खुद जाहिर कर दी है। अपनी जाति का भला करने के साथ ही राजस्थान की बाकी जातियां गश खाकर गिरने वाली नहीं हैं। इस बयान के बाद राजस्थान में राजपूत लहू में क्या उबाल नहीं आएगी और क्या वे घोड़ों  पर बैठ अपनी जाति की तुतुहि नहीं बजाने निकल पड़ेंगे? अगर ऐसा हुआ, तो ममता की जुबान से नये साल पर जो जहर निकला है, उसे राहुल गांधी का 2019 में केंद्रीय सत्ता पर उचक कर बैठने का सपना तो चकनाचूर होगा ही, क्या इससे समाज की समरसता का सत्यानाश नहीं  होगा? इतिहास साक्षी है कि कोमल भावनाएं ही समाज को जोड़ती और पुख्ता बनाती हैं, लेकिन जाति-जाति की रटंत से जो जहर रिसना आरम्भ होता है, उससे लोक मंगलाचरण तो कतई नहीं, हां, हाहाकारी सोच को हवा जरूर मिलती रही है। 

अब तक सार्वजनिक रूप से माना जाता था कि एक मंत्री के कार्यों से पूरे सूबे के लोगों की भलाई होती  है और उनकी ओर से शुरू किये गये कार्यक्रमों में विशेष समुदाय के पक्ष और उसी की भलाई के बरक्स किसी दूसरे समुदाय के साथ भेदभाव जैसी भावना न छू जाए। लेकिन उलटी बंसी जब बजने वाली ही और वह भी बीजेपी के जाते ही कांग्रेस के सत्तासीन किसी मंत्री जैसे ओहदेदार की ओर से, तो इसे लोकतंत्र की किस परंपरा आ आगाज कहेंगे। पहले से ही कांग्रेस अमेठी और रायबरेली को प्रगति के मानक पर कसती हुई अभी तक विकास के सारे कार्यक्रम निर्धारित किया करती आती थी, लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की सत्तासीन होने के तुरंत बाद राज्य की  उसी दल की वीरांगना मंत्री ममता भूपेश को अपने निर्वाचन क्षेत्र की समूची प्रगति की जगह उस इलाके की अपनी जाति के लोगों के भौतिक उत्थान को तरजीह देने की भावना इस ओर इशारा करती है कि सीकरी निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गयी इस अल्लड़ विधायक का जिगरा अब भी कितना छोटा है, तो जन प्रतिनिधि ही नहीं, मंत्री के ओहदे पर पहुंच जाने के बावजूद उनके दिल में समूचे राजस्थान की जनता के दुख-दर्द के खात्मे को लेकर ममत्व से उपजा कोई टीस और उससे  निकला ममता का छलकाव दिखा ही नहीं, तभी तो वे बोल पड़ीं कि अपनी जाति के लिए ही कल्याण कार्य करूंगी। इसे कहते हैं कि दिल में रहम हो, तो पुरुष और स्त्री का भेद नहीं करते, क्योंकि ये परिवार के संस्कार से मिला करता है।

क्या ममता मैडम राजस्थान सहित समूचे देश की जनता को बताएंगी कि ये संस्कार उन्हें अपने पिता या दादा से मिले थे या आज के वातावरण ने उनके चरित्र में ऐसी भावनाएं डालीं।  कांग्रेस के युवराज अध्यक्ष राहुल गांधी जनसभाओं में हजारों लोगों के बीच जिस तरह की बड़ी-बड़ी बातें कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे सर्वस्वीकार्य वैश्विक नेता को खरी-खोटी सुनाते हैं, उन्हीं की पार्टी की अदना-सी मंत्री ममता भूपेश के दिल में राजस्थान के गरीब-गुरबे की नहीं, 29 .29 प्रतिशत वोट लेकर सिर्फ अपनी ही जाति की भलाई की भावना हिलोरे ले रही है। ममता के इस एक विवादित बयान से भूचाल आये, न आये लेकिन इतना तय है कि सियासत में विचारधारा के बीच मतभेद इतना कटु हो गया है कि जुबान से  निकला जहर समाज की भलाई करने की जगह जाड़े में होलिका बन सकता है।

ऐसी मानसिकता, जिसमें ममता तो नाम हो और उसमें  ममत्व दूर-दूर तक दिखे ही नहीं- उसमें इस देश और समाज के कल्याण जनित शांति और शुचिता का क्या होगा राहुल गांधी जी? आप ही बताइये !