इमरान को सता रहा है पीओके पर कब्जे का डर

इमरान को सता रहा है पीओके पर कब्जे का डर

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A हटने के बाद पाकिस्तान परेशान होने का नाटक कर रह रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाकर वह बताने का एक दिखावटी प्रयास कर रहा है कि जम्मू कश्मीर पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय गलत है। पाकिस्तान भारत सरकार की मंशा को भली भाँती समझ रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने जम्मू कश्मीर से लौटकर सोमवार को गृह मंत्री अमीत शाह से जो मीटिंग की है, उसे सुनकर पाकिस्तान और भी बेचैन हो उठा है। वो सिर्फ इसलिए हौव्वा खड़ा कर रहा है कि कहीं भारत का अगला कदम पाक अधिकृत कश्मीर की तरफ न बढ़ जाए। अजीत डोभाल और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीयों के साथ गृह मंत्री की मीटिंग में निश्चित तौर पर कुछ न कुछ बड़ा फैसला हुआ होगा। देश के रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह के द्वारा पी ओ के पर दिए गए एक ब्यान ने उस मीटिंग की एक बानगी तो पेश कर ही दी है। राज नाथ सिंह का यह कहना कि पाकिस्तान से बात अब सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर पर होगी।यानी इशारा साफ है कि अगला कदम पाक अधिकृत कश्मीर ही है।

पी ओ के यानि पाक अधिकृत कश्मीर की धरती आतंकवादियों की नापाक हरकतों और उनके जुल्मों से कांपती रहती है। यहाँ लश्करए तैयबा, जमातउद-दावा और तहरीकए-तालिबान जैसे आतंकी संगठन खूब फल फूल रहे हैं। ये सब मानवता को तार-तार कर रहे हैं। बिना लाग लपेट के कहा जा सकता है कि पाकिस्तान इनके लिए उर्वरा का काम कर रहा है। पी ओ के में कभी हजारों मंदिर हुआ करते थे लेकिन आज वहां गिनती के मंदिर बचे हुए हैं। एक रिपोर्ट कहती है कि वहां लगभग पंद्रह सौ मंदिरों को तोड़ दिया गया। 1989 से लेकर 1995 तक वहां क्या हुआ था, उसे पूरी दुनिया ने देखा था। मौत का नंगा नाच हुआ था। लगभग हजार कश्मीरियों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। खंडहर में तब्दील हो चूका वहां का शिव मंदिर, शारदा देवी मंदिर, जवाला देवी मंदिर और न जाने कितने अन्य मंदिरों के टूटे हुए पत्थर आज भी वहां की हैवानियत की कहानी कहते हैं। 1947 में वह क्षेत्र पाकिस्तान का नहीं था। वहां के राजा हरी सिंह से हुई संधि के मुताबिक़ भारत का कब्ज़ा पूरे जम्मू कश्मीर पर होना था, लेकिन पाकिस्तान ने धोखे से कबाइलियों के भेष में अपनी सेना भेजकर लड़ाई लड़नी शुरू कर दी। हमारे देश के तत्कालीन हुक्मरान उस समय क्यों खामोश बैठ गए, यह सवाल देश आज भी पूछ रहा है। हुक्मरानों की ख़ामोशी का परिणाम यह हुआ कि आज वह भाग पाकिस्तान के कब्जे में हैं। जिसे गुलाम कश्मीर भी कहा जाता है। पाकिस्तान उस धरती से भारत के खिलाफ आतंकवादियों की मदद से छदम युद्ध लड़ रहा है। भारत की निगाह आज उसी पर है। भारत को पता है कि पी ओ के पर कब्ज़ा करने के बाद पाकिस्तान की ताकत स्वतः ही आधी हो जायेगी। 73 वर्षों से पाकिस्तान अगर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता है तो वह सिर्फ और सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर के बलबूते। आज पाकिस्तान की बेचैनी सिर्फ इस बात को लेकर है कि कहीं हिन्दुस्तान की वर्तमान सरकार पी ओ के पर कुछ बड़ा एक्सन न लेले। सोमवार को गृह मंत्री मंत्री की मीटिंग में एक खाका तैयार हुआ होगा। अब चर्चा शायद इस बात पर हो रही होगी कि उसे अमली जामा कैसे पहनाई जाए। भारत उस कलंक को मिटाने की तैयारी में लग गया है। पी ओ के की वजह से चीन को भी फायदा हो रहा है। चीन ने 1978 में पाकिस्तान और चीन के बीच काराकोरम हाईवे का निर्माण कराया था। यह सबको पता है कि उस हाईवे के जरिये चीन पाकिस्तान को परमाणू हथियार सप्लाई करता है। चीन को भी एहसास है कि अगर भारत का कब्ज़ा पी ओ के पर हो गया तो उसे भी काफी नुकसान उठा पड़ सकता है। इसलिए वो अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का साथ दे रहा है। 72 सालों के बाद आज जम्मू कश्मीर से एक बीमारी 370 और 35 A गई, लेकिन पीओके रूपी कैंसर निश्चित तौर पर गृहमंत्री अमीत शाह और प्रधानमंत्री मोदी को परेशान कर रहा होगा। ऐसे में अब यह मान लेना चाहिए कि बहूत जल्द सरकार पीओके पर कुछ ठोस निर्णय ले ही लेगी। पाकिस्तान के वजीरे आजम इमरान खान की घबराहट और बढ़ने वाली है। इमरान को अच्छी तरह पता है कि जिस पीओके पर उसका कब्ज़ा है वो अवैध है। भारत के तत्कालीन सरकार की कुछ गलत नीतियों के चलते आज तक पाकिस्तान उस पर कुंडली मार के बैठा है। जिस तरह जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A  हटा उसी तरह पीओके पर भी भारत का कब्ज़ा हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये। रही बात देश के कुछ कुंठित लोगों की तो वो बयानबाजी करते रहें। 370 और 35 A को लेकर भी बातें होती रहती थी कि जम्मू कश्मीर की विधान सभा से बिना पारित करवाये आर्टिकल 370 और 35 A नहीं हटाए जा सकते। लेकिन सब हो गया। बड़े निर्णय लेने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति का होना बेहद जरूरी है। प्रधामनंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देश वासियों को दे दिया है। अब इमरान खान चिल्लाते रहें, दुनिया मे घूम-घूमकर रोना रोते रहें। हकीकत यही है कि भारत का अगला पड़ाव पाक अधिकृत कश्मीर ही  है।