मध्य प्रदेश का कैसे बना ये पहला कैशलेस गांव

मध्य प्रदेश का कैसे बना ये पहला कैशलेस गांव

गांव-प्रधान भारत के ह्रदय राज्य कहे जाने वाले मध्य प्रदेश का बडझीरी गांव इसलिए चर्चा में है, क्योंकि ये राज्य का पहला गांव है, जिसने कैशलेस सुविधा को सहर्ष अंगीकार कर लिया। ये गांव भोपाल जिले के फांदा तहसील में स्थित है और भोपाल से 22 किलोमीटर पश्चिम में पड़ता है। इस गांव में हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषी भी अच्छे-खासे हैं।

गांव में होंगी बैंक संबंधी सुविधाएं

गांव में लगभग 99 प्रतिशत लोगों को बैंक खाते खोलकर उन्हें एटीएम सुविधा भी दी गयी है। इससे लोगों को धन निकलने में भी सहूलियत रहेगी, क्योंकि इस काम में समय भी जाया नहीं होगा। इतना ही नहीं, गांव के सभी दुकानों और विक्रय केन्द्रों में पीओएस मशीनें लगाई गयी हैं। आज बडझीरी में उपलब्ध कैशलेस सुविधा के इस दायरे में नकदी के लेनदेन के कार्य तुरंत हो जाते हैं और आर्थिक भ्रष्टाचार में लगे ठेकेदारों की भी मनमानी नहीं चलती।

जो एक्सप्रेस गलियारा उपलब्ध कराया गया है, उससे एटीएम है, तो लोगों को पासबुक प्रिंटर सुविधा मुहैया करायी गयी है। एक्सप्रेस गलियारा सुलभ हो जाने से इससे नकदी जमा के कार्य भी बडझीरी में आसान हो गये हैं। जब ग्राहक केंद्र बैंक के परिसर में हो, तो दूसरी जगहों में जाने का समय और शक्ति बचती है। साथ ही, मन लाकर बैंकों के ग्राहक भी अपने बेहद आवश्यक कार्य कर पाते हैं।

गैरजरूरी अडंगा भी खत्म

बडझीरी में सहूलियत के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किये गये हैं। इसका लाभ ये है कि व्यावसायिक एजेंट यहां उपलब्ध कंप्यूटरों और हैण्ड होल्ड मशीनों से ग्राहकों को सभी बैंक-प्रदाता सेवाएं दे पाएंगे। इस तरह बिचौलिए का गैरजरूरी अडंगा भी खत्म होता है। 

बडझीरी भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के राजनीतिक प्रभाव वाले हुजूर विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। ये भाजपा के ही सांसद आलोक संजर का सियासी क्षेत्र में है। इस गांव में कुल 230 घर मिलेंगे। यहां की कुल जनसंख्या 1351 है, जिनमें पुरुष 691 और महिलाएं 660 हैं। गांव में 864 साक्षर लोग हैं, जिनमें 523 पुरुष और 341 महिलाएं हैं।

इस गांव को बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने गोद लिया है। राज्य के इस पहले डिजिटल गांव और वहां हो रहे विकास कार्यों के लगातार प्रोत्साहन से ये महती कार्य संभव होना ही था। बैंक के खाता खोलोअभियान में करीब 2,000 लोगों के खाते खुले हैं। इससे लोगों को पैसा सुरक्षित रखने की रही-सही चिंता भी समाप्त हो गयी होगी।

विकास कार्यों में लोगों का बढ़ा विश्वास

जब बैंक में पैसा जमा रहता है, तो भोले-भाले गांव के लोग चैन से अपने कार्य करते हैं। इस राष्ट्रीयकृत बैंक ने लोगों को मुफ्त वाई-फाई सुविधा प्रदान कर कार्य को जिस तरह सुगम बनाया है, वैसा अन्य क्षेत्रों में हो, तो वहां के लोग में विकास कार्यों में हाथ बंटाने में सुविधा महसूस करेंगे।

संचार के इस नए साधन के हाथ में आते ही बडझीरी का विकास अन्य क्षेत्रों में तेजी से होने का रास्ता खुलेगा और वहां के लोगों की चेतना में नई जान भी आएगी। वैसे राजनीतिक इच्छा-शक्ति हो, तो असंभव कुछ भी नहीं होते। संचार के कई नए साधन उपलब्ध होने से बडझीरी गांव के विद्यालयों में सैकड़ों कंप्यूटर आ गये हैं, जिससे लोगों को एक ही जगह बैठकर तेजी से, किंतु अपने कार्यों के निष्पादन में सुविधा हुई है। वर्तमान में, इस गांव में साक्षरता कैम्प भी आये दिन लगते रहे हैं, इससे लोगों का अक्षर ज्ञान और अपना जीवन संवारने का मौका मिला है।

बडझीरी में डिजिटल आन्दोलन को विकास के पंख लगे। इससे विकास यात्रा के डिजिटल डैने और ऊंची परवाज भरेंगे, यही उम्मीद है। ये कैशलेस होने से सहज भी होकर रहेगा।