स्वामी के पत्र पर गृह मंत्रालय ने मांगी राहुल से सफाई

स्वामी के पत्र पर गृह मंत्रालय ने मांगी राहुल से सफाई

चुनाव जो न कराएं। चुनावों में एक से एक गड़े मुर्दे उखड़ने लगते हैं। लेकिन मुर्दे तो मुर्दे ही होते हैं, उनमें जान नहीं फूंकी जा सकती। यही हाल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता के मुद्दे का भी है। इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के पत्र के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी से 15 दिन के भीतर सफाई मांगी है। स्वामी ने अपने पत्र में कहा है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की नागरिकता ले ली है, इसलिए इनकी भारत की नागरिकता रद्द की जाए। इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब कोई सांसद पत्र लिखता है तो उस पर कार्यवाही की जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। उसी सामान्य प्रक्रिया के तहत राहुल गांधी से सफाई मांगी गई है।

इस देश के लोग काफी समझदार हैं। वे सब समझ रहे हैं कि ऐन चुनावों के बीच यह नोटिस राहुल गांधी को क्यों भेजा गया है। वह भी उस मामले को लेकर जिस पर चुनाव आयोग विचार कर चुका है, लोक सभा की एथिक्स कमेटी में यह मामला उठ चुका है और जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। अगर इस मामले में थोड़ा भी दम होता तो यह मामला आज से काफी पहले ही जोर पकड़ चुका होता। क्योंकि सुब्रह्मण्यम स्वामी दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर काफी पहले से घूम रहे हैं, लेकिन उनके दस्तावेजों में किसी को कोई दम नहीं दिखता और देखते ही मामला खारिज हो जाता है। स्वामी गृह मंत्रालय को राहुल की नागरिकता के खिलाफ दो बार पत्र लिख चुके हैं। सबसे पहले 21 सितंबर 2017 को स्वामी ने इस बारे में एक शिकायत की। 29 अप्रैल 2019 को स्वामी ने दूसरा पत्र लिखा। अब कोई राजनाथ सिंह से ये पूछे कि अगर सांसद के पत्र पर कार्यवाही की जाती है तो जब उन्होंने 2017 में पत्र लिखा था, तभी मंत्रालय ने राहुल को नोटिस क्यों नहीं जारी किया और अब क्यों जारी किया। इसका एक ही जवाब है कि तब चुनाव नहीं चल रहे थे और अब चुनाव चल रहे हैं।

स्वामी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि 2003 में ब्रिटेन में बैकअप्स लिमिटेड नामक कंपनी का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इस कंपनी का पता 51 साउथगेट स्ट्रीट, विंचेस्टर, हैंपशायर SO23 9EH है और राहुल इसके एक निदेशक थे। स्वामी ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि कंपनी के 10-10-2005 और 31-10-2006 को फाइल किए गए वार्षिक रिटर्न में राहुल की जन्मतिथि 19-06-1970 अंकित है। इसमें राहुल की नागरिकता ब्रिटिश बताई गई है। ये कंपनी 2009 में भंग कर दी गई। 17-02-2009 को डिसलूशन अप्लीकेशन के समय भी राहुल की नागरिकता ब्रिटिश बताई गई है।

2015 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। एक वकील एमएल शर्मा इस मामले को लेकर पहले राष्ट्रपति के पास गए और फिर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने अपनी याचिका के साथ दस्तावेज भी जमा कराए थे। ये वही दस्तावेज थे, जिसका हवाला सुब्रह्मण्यम स्वामी दे रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका देखते ही खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। तत्कालीन चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील एमएल शर्मा द्वारा दाखिल इस याचिका को फालतू करार देते हुए कहा कि जनहित याचिका किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं दायर की जाती। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील पर सवालों की झड़ी लगा दी। पीठ ने कहा कि आप राष्ट्रपति के पास प्रतिनिधिमंडल लेकर कैसे गए? आपको ये दस्तावेज कहां से मिले? आप सीबीआई के पास क्यों गए, यह गलत प्रक्रिया है। मार्च 2016 में यह मामला लोकसभा का एथिक्सस कमेटी में भी उठा। एथिक्स कमेटी ने भी राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था। राहुल से नोटिस में पूछा गया था कि क्या उन्होंने कभी अपने को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया है। पर वहां भी मामला टांय-टांय फिस्स हो गया। एक व्यक्ति इस बार अमेठी से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने भी इस मुद्दे को उठाया और निर्वाचन अधिकारी से दोहरी नागरिकता के आधार पर राहुल गांधी का नामांकन खारिज करने की अपील की। लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने राहुल के दस्तावेजों को सही पाया।

चूंकि गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया है और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसे सामान्य प्रक्रिया के तहत हुई कार्यवाही बता रहे हैं इसलिए इनसे पूछना बनता है कि अगर राहुल गांधी नहीं बताएंगे तो क्या देश को पता नहीं चलना चाहिए। क्या यह पता लगाना देश का काम नहीं है कि एक दोहरी नागरिकता वाला व्यक्ति देश में रह रहा है और रह ही नहीं रहा है बल्कि चुनाव लड़ रहा है और उनके साथ संसद में बैठ रहा है। सुब्रह्मण्यम स्वामी के दिए साक्ष्यों के आधार पर कंपनी ब्रिटेन में पहली बार 2003 में रजिस्टर्ड हुई, जिसमें राहुल गांधी ने अपने आप को ब्रिटिश नागरिक बताया है। इत्तफाक से 2003 में भी भाजपा की ही सरकार थी। तब वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की। हम मान लेते हैं कि 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी और उस दौरान राहुल गांधी के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन 2014 से पिछले पांच साल तक भाजपा की ही तो सरकार है। और राजनाथ सिंह उस सरकार में शुरू से ही गृह मंत्री हैं। क्या उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं पता था। पता था तो कार्रवाई क्यों नहीं की। अब जब सरकार जा रही है और चुनाव चल रहे हैं तब क्यों नोटिस जारी की गई। अगर उन्हें इस मामले की सब जानकारी थी और नोटिस नहीं जारी किया तो तब उन्हें इस मामले में कोई दम नहीं दिख रहा था और अब चुनावी लाभ लेने के लिए नोटिस जारी किया गया है। अगर उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी तो ये और भी गंभीर बात है कि इतने बड़े देश के गृह मंत्री को ऐसे संवेदनशील मसले की जानकारी नहीं थी। यह सरकार की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

बहरहाल कांग्रेस ने इऩ आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि राहुल गांधी जन्म से भारतीय हैं और पार्टी बीजेपी सांसद के दावे को खारिज करती है। उन्होंने कहा कि मोदी के पास बेरोजगारी का कोई जवाब नहीं है। मोदी जी के पास ब्लैक मनी पर कोई जवाब नहीं है तो वह झूठे आरोपों के सहारे नोटिस जारी कर लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। यही बात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कही है। उन्होंने कहा है कि पूरे देश को पता है कि राहुल गांधी जन्म से ही भारतीय हैं।