खूब लड़े पर विकास नहीं रुकने दिया, इसलिए साथ हैं

खूब लड़े पर विकास नहीं रुकने दिया, इसलिए साथ हैं

महाराष्ट्र के अमरावती से चुनाव प्रचार शुभारंभ करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि शिवसेना हो या भाजपा, किसी ने भी आपसी संगठन के संघर्ष को विकास में रुकावट का कारण नहीं बनाया। उद्धव ठाकरे का ये बयान इसलिए भी सही माना जा सकता है, क्योंकि भाजपा-शिवसेना के करीब ढाई दशक पुराने गठबंधन में बहुत विवाद और नोकझोंक हुई है, ये जगजाहिर है। पर ये भी सही है कि दोनों में प्रगाढ़ दोस्ती भी कम नहीं रही है। जब भी बात विकास की हुई, शिवसेना ने कभी भी अडंगे की कोशिश नहीं की। शिवसेना-भाजपा में जितने भी विवाद हुए, तो वो राम मंदिर निर्माण में देरी, पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक आदि कई राष्ट्रीय मुद्दों पर ही केंद्रित थे। शायद ही कभी उसने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार के विकास कार्यों को लेकर सवाल खड़े किए हों। यहां तक कि मुंबई-नागपुर को सीधे जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे समृद्धि कॉरीडोरकी आलोचना की भी, तो शिवसेना कोटे से पीडब्ल्यूडी मंत्री बने एकनाथ शिंदे ने ही समृद्धि कॉरीडोर को एक आमूल-चूल परिवर्तन वाला कदम बताकर इस विवाद को ख़त्म कर दिया था।

कुछ ऐसा ही अन्य छोटे-मोटे अन्य मुद्दों पर भी हुआ है। वैसे भी कहा जाता है कि जिस तरह ताली एक हाथ से नहीं बजती, वैसे ही दोस्ती भी दोनों तरफ से निभाई जाती है। अब जिसे उद्धव ठाकरे दोहरा रहे हैं, बीते दिनों मुख्यमंत्री फडणवीस भी कह चुके हैं कि हमारे बीच मतभेद रहे हैं, पर सरकार चलाने में वे कभी बाधा नहीं बने। जहां तक आपसी विवाद का सवाल है, तो ये विवाद इतना बढ़ गया था कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बार-बार राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके विरोधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तीखे हमले चौकीदार चोर हैतक को दोहरा दिया था। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अफज़ल ख़ानभी बताया था, जो शिवाजी के काल में औरंगज़ेब का क्रूर प्रतिनिधि था। शाह ने भी उद्धव को चूहातक कहा था। शिवसेना का मुखपत्र सामनातो लगभग रोज ही मोदी सरकार पर हमलावर रहा। दोनों हिंदुत्व दलों के बीच मतभेदों को दोनों ही पक्ष के नेताओं ने जमकर हवा दी थी, जिससे लगने लगा था कि उनमें अलगाव बस होने को ही है।

इस बीच कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री फड़णवीस और उद्धव ठाकरे शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे स्मारक के निर्माण की शुरुआत के लिए वास्तु पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और बातचीत भी की। तभी ये माना जाने लगा कि अब विरोध की बर्फ पिघलने लगी है। फिर जब भाजपा अध्यक्ष शाह, उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री फडणवीस ने घोषणा की कि उनके आरोप-प्रत्यारोप दफन हो चुके हैं और इस क्षण से हम एक संयुक्त मोर्चे के रूप में संघर्ष करेंगे’, तो साफ़ हो गया कि अब फिर दोनों दल साथ-साथ ही हैं। सीट बंटवारा हुआ और तय हो गया कि लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वास्तव में भाजपा-शिवसेना का विवाद इसलिए भी टिकाऊ नहीं था, क्योंकि दोनों दल करीब-करीब समान विचारधारा रखते हैं। ये दोनों हिंदुत्व की उस डोर से बंधे हैं, जिसे फिलहाल तोड़ पाना संभव नहीं है। इस आधार पर उद्धव ठाकरे के बयान से इत्तेफाक रखा जा सकता है।