गोआ से गर्त में कांग्रेस।

गोआ से गर्त में कांग्रेस।

गोआ में राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के दो विधायकों का बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलना कांग्रेस के लिए बुरी खबर है। बहुमत से कहीं ज्यादा काम सीटें मिलने के बाद भी गोआ में भाजपा की सरकार बनना किसी चमत्कार से कम नही था। पार्टी हाई कमान इस कोशिश में था कि कैसे वहाँ जनाधार बढ़ाया जाए। कांग्रेस के दो विधायकों का भाजपा में जाना जहां इस बात का सबूत है कि कांग्रेस से नाराजगी बढ़ रही है वहीं अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है।

2017 विधान सभा की बात करें तो गोआ की कुल 40 सीटों वाली विधान सभा मे भाजपा 13 जबकि कांग्रेस के 17 प्रत्याशी चुनाव जीत कर विधान सभा पहुंचे। अन्य सीटों पर एकाद छोटी पार्टियां और निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इतनी कम सीटों के बावजूद अमित शाह की रणनीतिक सोच की वजह से वहां बीजेपी सरकार बनाने में सफल रही। लोकसभा चुनाव बेहद करीब है ,ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि गोआ की मात्र दो संसदीय सीटों जिन पर वर्तमान में बीजेपी काबिज है वो उसके हाथ से ना जाएं।

जिस तरह कांग्रेसी विधायकों का अपनी ही पार्टी से मोहभंग हो रहा है उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि लोकसभा चुनाव आते आते कांग्रेस के कुछ और विधायक अपनी पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं। अभी तो कांग्रेस विधायक सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपते ही अमित शाह से मिले हैं। इन दोनों विधायकों के बीजेपी में शामिल होने की घोषण अनौपचारिक रूप से हो चुकी है। हो सकता है लोकसभा चुनाव से पहले गोआ में कांग्रेस के विधायक गिनती मात्र के रह जाएं।

कुल मिलाकर अमित शाह की रणनीति कारगर होती दिख रही है। अगर इसी तरह सब होता रहा तो गोआ के अगले विधान सभा चुनाव से पहले कहीं कांग्रेस हासिए पर न चली जाय।