परम्परा पर कोर्ट का हथौड़ा

परम्परा पर कोर्ट का हथौड़ा

नागपुर में आरएसएस के पथ संचलन के दौरान लाठी लेकर चलने पर एक साहब को इतना बुरा लगा कि उन्होंने स्थानीय कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिया। कोर्ट ने भी याचिका स्वीकार कर मोहन भागवत को नोटिस जारी कर दिया। अब सवाल ये है कि क्या किसी धर्म या किसी संस्था की परंपरा को भी बंद कर दिया जायेग।

आरएसएस के लोग वर्षों से शाखा लगाते आ रहें हैं। शाखाओं में तमाम तरह के व्यायाम के साथ लाठी चलाने की भी गुर सिखाए जाते हैं। शारीरिक कौशल के दर्जनों कलाएं इनकी परंपरा के हिस्सा हैं। आरएसएस के पथ संचलन के दौरान संघी लाठी लेकर चलते हैं।

सिख समुदाय के लोग अपने धर्म की परंपरा के मुताबिक कृपाण लेकर चलते हैं। मुस्लिम समाज के लोग मोहर्रम के दौरान लोहे की जंजीरों के अलावा और कई प्रकार के हथियार लेकर चलते हैं।

हमारा भारत संस्कृति और परंपराओं का देश है। भिन्न भिन्न प्रकार की परम्परायें यहाँ वर्षों से चल रहीं हैं। अपने अपने धर्म के हिसाब से लोग उन परम्पराओं का अनुपालन वर्षो से करते आ रहे हैं। आरएसएस भी अपनी कुछ बुनियादी परम्पराओं का समय समय पर प्रदर्शन करता है। उन्ही में एक है पथ संचलन के समय हाथों में लाठी लेकर चलना। किसी व्यक्ति को आरएसएस की यह परम्परा अच्छी नही लगी और पहुंच गए कोर्ट। कोर्ट ने भी उनकी बात सुन ली, उनके द्वारा दायर याचिका स्वीकार कर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को नोटिस जारी कर दिया।

अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या देश की सारी पसरम्पराओं पर बैन लगेगा। कोर्ट के खिलाफ बोलना अवमानना हो सकता है तो क्या कोर्ट को कार्रवाई के समय परम्परा का कोई भी ख्याल नही होता? खैर देखते हैं। कल किसी और परंपरा के खिलाफ किसी को नोटिस जारी हो जाय तो आश्चर्य नही होगा।