इस जनम में बोनस...उस जनम में....

इस जनम में बोनस...उस जनम में....

विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक-आध्यात्मिक समागम वाला प्रयाग महाकुंभ। इस दिव्य आयोजन का समापन जरूर हो गया है, पर अनेकानेक मीठी यादों को समेटे अबकी का ये कुंभ कई मायनों में यादगार रहा। इसे बरसों याद रखा जाएगा। अबकी कुंभ में कई मामलों में विश्व रिकॉर्ड टूटे, तो पहली बार ऐसी व्यवस्था दिखी, जो शायद ही इससे पहले कभी दिखी हो। ऐसा इसलिए संभव हो सका, क्योंकि सरकार ने जो प्रयास किए, वे तो थे ही, साथ ही थी, यहां सेवा देने वाले एनजीओ, सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों की कड़ी मेहनत और चौकसी। इनकी बदौलत ही बड़े आराम से इतना भारी-भरकम आयोजन सकुशल सफल हो सका। अब जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां कुंभ ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मियों को होली से पहले बतौर बोनस एक माह के अतिरिक्त वेतन और सुरक्षा बलों के जवानों को कुंभ सेवा मेडल देने की घोषणा की है, तो ये सही मायने में उनकी सेवा का ही इनाम है।

ये इन अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा ही थी कि जब यहां देश-विदेश से हुजूम में श्रद्धालु पहुंचे, तो वे बड़े आराम से प्रयाग कुंभ का दीदार कर सके। सरकार ने सुविधाओं की व्यवस्था की, तो इसे अमलीजामा पहनाया अधिकारियों और कर्मचारियों ने। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 450 साल बाद श्रद्धालुओं के लिए अक्षयवट और सरस्वती कूप खोला, तो देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालुओं के हुजूम को कतारबद्ध कर आसानी से सबको इसके दर्शन-पूजन करने का सौभाग्य दिया सुरक्षाकर्मियों और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों ने। जब 193 देशों के प्रतिनिधियों, देश-विदेश से जुटे श्रद्धालु, साधु-संत, नागा वगैरह ने सकुशल डुबकी लगाई, तो उनकी सुरक्षा का इंतजाम भी इन्होंने ही किया। पहली बार 70 देशों के ध्वज संगम तट पर फहराए, तो 6000 आध्यात्मिक-सांस्कृतिक संस्थाओं को कुंभ में बसाने के बाद उनकी सुविधा-असुविधा का ख्याल भी इन्होंने ही रखा। इतना ही नहीं, अबकी जब प्रयाग कुंभ में कई विश्व रिकॉर्ड बनाकर विश्व में सफलता का झंडा लहराया, तो ये भी बिना सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग और कर्तव्य के प्रति सजगता के बिना संभव नहीं था।

चाहे आधी रात का वक्त रहा हो या भोर का, कुंभ के भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था के लिए ये अफसर-कर्मचारी न सिर्फ जागते रहे, बल्कि भीड़ के बीच जूझते भी रहे। इन्होंने अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया और जितना संभव हो सका, अबकी के प्रयाग कुंभ को यादगार बनाने में सहयोग दिया। ये उनकी अपने कर्तव्य के प्रति सजगता ही थी कि कुंभ को लेकर सरकार जैसा चाहती थी, सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों ने उसे कामयाब बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। तभी यहां देश-विदेश से आए अनेक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के साथ यहां की सुनहरी यादों को भी संजोकर ले जा सके। बोनस या मेडल सही मायने में ये उनकी कुंभ में दी गई बेहतर सेवाओं का ही इनाम है। साथ ही ये वह संदेश भी है, जिससे इन अधिकारियों-कर्मचारियों को आगे भी अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक रहने का मनोबल बढ़ेगा। सभी समझ सकेंगे कि अगर वे अपना कर्तव्य बखूबी निभाएंगे, तो सरकार भी उनका अच्छे से ख्याल रखेगी। सरकार के इस प्रयास की सराहना की जा सकती है। ये भी कह सकते हैं कि इस जन्म में तो उन्हें तो सेवा का फल बोनस के रूप में मिला है, पर धार्मिक नजरिए से देखें, तो हो सकता है कि अगले जन्म में भी उन्हें इस कुंभ सेवा का बढ़िया फल मिले।