भाजपा-शिवसेना की राह हुई आसान

भाजपा-शिवसेना की राह हुई आसान

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी का प्रकाश आंबेडकर के साथ गठबंधन था। इससे मोदी लहरके बावजूद महाराष्ट्र में कांग्रेस दो और एनसीपी चार सीट जीत गई थी। अब लोकसभा चुनाव के लिए भारिप बहुजन महासंघ प्रमुख प्रकाश आंबेडकर और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आपस में गठबंधन कर वंचित बहुजन विकास आघाड़ी बना ली है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन के सामने कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन है, पर ओवैसी-अंबेडकर का ये तीसरा गठजोड़ अब चुनाव मैदान में साथ उतर रहा है, तो ये अंतत: कांग्रेस-एनसीपी का दलित-मुस्लिम वोट ही काटेगा। इसका सीधा फायदा भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिलेगा। प्रकाश आंबेडकर दलित और ओवैसी मुस्लिम मतों को अपने साथ अगर ले जाने में कामयाब हो गए, तो कांग्रेस-एनसीपी गठजोड़ के सामने मुसीबत खड़ी हो सकती है। वजह ये कि महाराष्ट्र में दलित और मुस्लिम ही कांग्रेस-एनसीपी के परंपरागत मतदाता रहे हैं। मुस्लिम-दलित ही वो समीकरण रहा है, जिस पर पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नांदेड़ और हिंगोली लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी।

तब नांदेड़ से वर्तमान महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने भाजपा के दिगंबर पाटिल को 81 हजार 455 मतों से हराकर चुनाव जीता था। साल 2011 के आंकड़ों के अनुसार, नांदेड़ में 14.4 प्रतिशत मुस्लिम और 10.54 प्रतिशत दलित मतदाता अबकी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से छिटक सकते हैं। वहीं हिंगोली से सिर्फ 1,629 वोटों से चुनाव जीते राजीव सातम के लिए अब यहां के 10.83 फीसदी मुस्लिम और 15.01 फीसदी दलित मतदाता परेशानी का सबब बन सकते हैं। खास ये भी है कि मुस्लिम-दलित समीकरण पर ही पिछले लोकसभा चुनाव में नांदेड़ और हिंगोली लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने परचम लहराया था। नांदेड़ में 2011 के आंकड़े के मुताबिक, यहां 14.4 फीसदी मुस्लिम और 10.54 फीसदी दलित मतदाता हैं। अब इसका सीधा फ़ायदा भाजपा को मिलेगा। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के बाद देश को सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें देने वाला राज्य महाराष्ट्र ही है, जहां लोकसभा की 48 सीटें हैं।

पिछले चार साल में सूबे की सियासत में मराठा आरक्षण, किसान कर्जमाफी आंदोलन, अदिवासी आंदोलन और भीमा कोरेगांव हिंसा का मुद्दा छाया रहा है, पर इसके बावजूद भाजपा पंचायत और निकाय चुनावों में दबदबा बरकरार रखने में कामयाब रही है। प्रकाश अंबेडकर और असदुद्दीन ओवैसी महाराष्ट्र में अब तक करीब सात जनसभाएं भी कर चुके हैं। इनकी रैलियों में जुटने वाली भीड़ जहां एक तरफ कांग्रेस-एनसीपी की नींद उड़ा रही है, तो वहीं भाजपा-शिवसेना गठबंधन के चेहरे पर मुस्कान है। हो भी क्यों ना, भाजपा-शिवसेना के अपने वोटर साथ हैं ही, ओवैसी-अंबेडकर गठबंधन के बाद मुस्लिम और दलित मतदाता कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से खिसक जाएंगे। ले-देकर कांग्रेस और एनसीपी के पास अब वही मतदाता बच जाएंगे, जो उनके अपने रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर कोई चमत्कार या फिर कोई विवाद वाली बात नहीं हुई, तो भाजपा-शिवसेना गठबंधन की राह महाराष्ट्र में आसान होगी।