मिर्ची हमले को लेकर पीएम पर निशाना

मिर्ची हमले को लेकर पीएम पर निशाना
मिर्ची हमले को लेकर पीएम पर निशाना

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोई भी ऐसा मौका हाथ से नहीं जाने देतेजिसमें उन्हें थोड़ी भी भाजपा विरोध की गुंजाइश दिखती हो। कभी एलजी को लेकर, तो कभी दिल्ली पुलिस को लेकर, तो कभी विकास कार्यों के लिए केंद्र की ओर से फंड न जारी किए जाने को लेकर। यहां तक कि अगर किसी ने उनसे नाराज होकर कुछ कर दिया तो इसके लिए सीधे पीएम को जिम्मेदार ठहराने से भी नहीं चूकते। जूते से हमला हो या मिर्ची हमलाकर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग हो या कोई अन्य मुद्दा, वे हर काम के लिए पीएम मोदी और भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराते हैं।

पिछले दिनों हुए मिर्ची हमले में तो वे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के हालचाल पूछने पर ही भड़क गए। यहां तक कह दिया कि पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में चार बार हमले करवाए गए। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के सीएम को सुरक्षा नहीं दे सकते, तो वे इस्तीफा दे दें। अब जब कर्मचारी पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, तो केजरीवाल न सिर्फ वहां धमक गए, बल्कि माइक हाथ में लेते ही केंद्र सरकार पर बरस पड़े। वादा किया कि वे विधानसभा के विस सत्र में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजेंगे। केंद्र को यहां तक चेतावनी दे दी कि यदि अगले तीन महीने में कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं की गई, तो 2019 में कयामत आ जाएगी। जहां तक विधानसभा के विस सत्र की बात है, तो भाजपा और कांग्रेस ने अपने 20 साल के कार्यकाल में सिर्फ तीन विशेष सत्र ही बुलाए थे, तो केजरीवाल सरकार ने पिछले साल ही तीन विशेष सत्र बुला लिया। बात-बात में विशेषसत्र बुलाकर दिल्ली सरकार निगम, उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस और ईवीएम का डेमो देने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती हैं। मतलब केजरीवाल की ऐसी पहली सरकार है, जिसने अपने चार साल के शासनकाल में ताबड़तोड़ विधानसभा के विशेष सत्र बुलाए हैं।

हालिया मामले में कर्मचारियों के पुरानी पेंशन बहाली की मांग में साथ देकर केजरीवाल हर हाल में केवल और केवल भाजपा का विरोध ही करना चाहते हैं। इतना ही नहीं, अब एक इमरान नामक शख्‍‍‍स जिंदा कारतूस के साथ उनसे मिलने पहुंच गया। हालांकि पुलिस ने अंदर जाने से पहले जांच के दौरान ही उसके पास से जिंदा कारतूस बरामद कर उसे हिरासत में ले लिया। इमरान उन मौलवियों के साथ था, जो वक्फक बोर्ड से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर केजरीवाल से मिलने जनता दरबार में पहुंचे थे। बहुत संभव है कि देर-सबेर केजरीवाल इसके लिए भी केंद्र की मोदी सरकार को कसूरवार ठहरा सकते हैं। केजरीवाल को यह समझना होगा कि उनसे पहले भी दिल्ली में भाजपा और कांग्रेस ने शासन किया, लेकिन जितने हमले या विरोध केजरीवाल को झेलने पड़ रहे हैं, वैसा अन्य दलों के साथ क्यों नहीं हुआ? केजरीवाल को इस बात पर विचार करने की जरूरत है। अगर उनकी नीतियों से कोई आहत होता है, तो उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं, न कि भाजपा या अन्य कोई दल विशेष। इसे उन्हें स्वयं सोचना और इसका समाधान भी करना होगा।