अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों की अयोग्यता : स्पीकर के फैसले पर उच्च न्यायालय की मुहर

अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों की अयोग्यता : स्पीकर के फैसले पर उच्च न्यायालय की मुहर

दक्षिण भारतीय राज्य तमिनाडु में अन्नाद्रमुक के विद्रोही 18 विधायक अयोग्य क्या घोषित किये गये, राज्य में निरंतर राजनीतिक उठापठक को दौर ही आरंभ हो गया। मद्रास उच्च न्यायालय ने स्पीकर के फैसले को बरकरार रख लोकतान्त्रिक व्यवस्था की ही लाज बचायी है। दरअसल, यह फैसला सत्तारूढ़ राज्य सरकार के लिए राहतभरा तो है किंतु इससे टीटीवी दिनकरन गुट को जोर का झटका भी लगा है। 

राज्य विधानसभा अध्यक्ष धनपाल ने इन विधायकों को लगभग 16 महीने पहले में अयोग्य घोषित किया था। अध्यक्ष का यह आचरण विधायकों को नागवार गुजरा, तब उन्होंने सितंबर, 2017 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई, कई ट्विस्ट आए और सभी की नजरें आज आने वाले फैसले पर टिकी थीं। न्यायालय के फैसले ने राज्य सरकार को राहत मिली है। 

उच्च न्यायालय के फैसले पर सदन के उपाध्यक्ष पी.वी. जयरमन गदगद हैं। वे इसे धर्म की जीत मानते हैं। लोकतंत्र में कपटी और धोखेबाजों के मुंह पर ये निर्णय एक तमाचा भी है। यदि कोई अपील भी दायर की जाती है तो विश्वास रहता है कि सच्चाई की जीत होगी ही। वहीं टीटीवी दिनकरन मायूस हैं। वे इसे अपने विरुद्ध झटका मानते ही नहीं। मतलब साफ है और वे आज के फैसले को सियासती अनुभव में एक और इजाफा मानते हैं। इस तरह की भावना लोकतांत्रिक राजनीतिक के लिए कहीं से ठीक नहीं है। इसलिए अगली रणनीति बनाने और उसमें 18 विधायकों की बैठक करने की उनकी भावना बताती है कि अब भी वे अनुकूल अवसर की ताक में हैं।

तमिलनाडु राज्य की राजनीति में विद्रोही विधायकों के इस फैसले के बाद अब आंकड़ों का खेल चक्र भी तेजी से चलेगा। अगर यह हुआ तो लोकतंत्र को ही नुकसान होगा। लेकिन लगता नहीं कि राज्य में सत्ता पाने और उसे बचाने की दिलचस्पी की विजय होने वाली है!