एनआरसी से नदारदों का क्या होगा ?

एनआरसी से नदारदों का क्या होगा ?

असम की बहुप्रतीक्षित नैशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस की अंतिम सूचि शनिवार को जारी कर दी गई। तक़रीबन 19.07 लाख आवेदकों को इस सूचि से बाहर रखा गया है। अब एन आर सी पर राजनीति होनी तय है। भाजपा इसका श्रेय खुद लेने का प्रयास करेगी जबकि कांग्रेस यह दावा करेगी कि एन आर सी की शुरुवात सबसे पहले कांग्रेस की सरकार ने किया था। हालांकि यह सत्य है कि कांग्रेस ने भाजपा सरकार से पहले एन आर सी का लगभग अस्सी प्रतिशत काम कर ही दिया था। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही चाहती हैं कि असम में विदेशी नागरिकों की पहचान हो ताकि उन्हें बाहर का रास्ता दिखाकर स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा सके। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अब उन लाखों लोगों का क्या होगा जिन्हें इस सूचि से बाहर किया गया है। वैसे एन आर सी की सूचि जारी होने के बाद वहां पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, फिर भी इतनी आसानी से वहां के हालात ठीक नहीं होंगे। एन आर सी की सूचि जारी होने के बाद अब दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि एन आर सी दिल्ली में भी लागू होनी चाहिए।

एन आर सी की जो लिस्ट जारी हुई है, उसमे 1906657 लोगों का नाम शामिल नहीं है। इसमें 3 करोड़ 11 लाख 2 हजार चार लोगों को शामिल किया गया है। हालांकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि जिन लोगों के नाम सूचि में नहीं है, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जायेगा। ऐसे में लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का हरसंभव मौका दिया जायेगा। साथ ही साथ इस बात का अस्वासन भी दिया गया है कि लिस्ट में नाम न होने की सूरत में लोग फारेन ट्राब्युनल में अपील भी कर सकते हैं। असम की सरकार ने अपील करने की समय सीमा बढ़ाकर 60 दिन से 120 दिन भी कर दिया है। इस बीच विरोध के स्वर भी गूंजने लगे हैं। एआईएम्आईएम् के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भाजपा को हिन्दू और मुस्लिम के आधार पर देश भर से उठ रही एन आर सी की मांग को बंद कर देना चाहिए। बहरहाल लाखों लोग जिनका नाम इस सूचि में नहीं है, वो परेशान तो होंगे ही। अब सवाल यह पैदा होता है कि वो लोग करेंगे क्या। फिलहाल असम की सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि वहां कोई दंगा फसाद न हो।