जम्मू कश्मीर पर विपक्ष का सियासी नाटक

जम्मू कश्मीर पर विपक्ष का सियासी नाटक

जम्मू कश्मीर गए विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल को श्री नगर एयर पोर्ट पर रोकना और सुरक्षा कर्मियों द्वारा मिडिया कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करना चिन्तनीय है। भाजपा नेत्रित्व वाली एनडीए सरकार ने वहां से आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A हटा लिया है। देश की जनता यह जरुर जानना चाह रही है कि अब वहां की स्थिति क्या है ? सरकार दावा कर रही है कि जम्मू कश्मीर में शान्ति है।  ऐसे में विपक्ष के नेताओं को जरूर बताना चाहिए कि वो वहां क्यों जाना चाहते हैं। लेकिन विपक्षी नेताओं को रोकना और मिडिया कर्मियों से बदसलूकी करने के मामले को सही नहीं ठहराया जा सकता।
केंद्र में भाजपा नेत्रित्व वाली एनडीए की सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A  को समाप्त कर दिया है। सरकार द्वारा बताया जा रहा है कि वहां सब कुछ ठीक है। किसी को भी कोई परेशानी नहीं है। एहतियातन कुछ जगहों पर कर्फ्यू और कुछ क्षेत्रों में धारा 144  लगाईं गई है। सरकार यह दावा कर रही है कि हालात सामान्य हो जाने के बाद कर्फ्यू और धारा 144 हटा ली जाएगी। भाजपा के साथ देश की अन्य राजनितिक पार्टियाँ अपने–अपने हिसाब से काम करती हैं। विपक्ष की सभी पार्टियाँ भी चाहती है कि वो वहां जाएँ और लोगों से बात करें। शायद इसी सोच के साथ शनिवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेत्रित्व में एक विशेष प्रतिनिधि मंडल जम्मू कश्मीर गया। इस प्रतिनिधि मंडल गुलाम नबी आजाद, के सी वेणुगोपाल, आनंद शर्मा, लेफ्ट के सीता राम यचूरी, डी राजा, डीएमके के तिरुची शिवा, टीएमसी के दिनेश त्रिवेदी, एन सी पी के माजिद मेनन, आरजेडी के मनोज झा, जेडीएस के उपेन्द्र रेड्डी और शरद यादव शामिल हैं। इन विपक्षी नेताओं का जम्मू कश्मीर जाने का प्रोग्राम राहुल गांधी और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बीच हुई एक मामूली सी नोकझोंक के बाद बना है। कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था कि कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से हिंसा की ख़बरें आ रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी को शांति और निष्पक्षता के साथ मामले को देखना चाहिए। उस ट्वीट के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि वो राहुल गांधी को जम्मू कश्मीर आने का निमंत्रण देते हैं, साथ ही साथ कहा था कि उनके लिए एयरक्राफ्ट की भी व्यवस्था कर दी जाएगी। वो आयें और यहाँ की जमीनी हकीकत देख लें। राहुल गांधी और सत्यपाल मलिक के बीच हुई वह बातचीत भले ही व्यंगात्मक रही हो लेकिन आज वो व्यावहारिक रूप से जमीन पर दिखने लगी है। विपक्ष का प्रतिनिधि मंडल वहां गया, लेकिन उन्हें श्री नगर एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया। सुरक्षा कर्मियों ने उनकी आगे जाने की बात नहीं मानी। वहां पहुंचे मिडिया कर्मियों को भी सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया। नतीजा यह हुआ कि कोई भी मिडियाकर्मी किसी भी विपक्ष के नेता से नहीं मिल पाया।
जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A  की वजह से वहां के लोगों को जीने की आदत पड़ चुकी थी। 70  साल की उस अस्थायी व्यवस्था का वहां के कुछ सियासी दल खूब लाभ ले रहे थे। वहां के तमाम अलगावादी नेता जम्मू कश्मीर को अपनी जागीर समझ कर मनमानी करने पर उतारू रहते थे। ऐसे में जब वर्तमान सरकार ने आर्टिकल 370  और अनुच्छेद 35 A को ख़तम किया तो वो बिलबिला उठे। सरकार को इस बात का संदेह था कि वो लोग कुछ न कुछ ऐसा करने का प्रयास जरुर करेंगे ताकि वहां का माहौल खराब हो सके। सरकार ने इसी लिए कुछ दिनों के लिए वहां पर कुछ पाबंदियां लगा दीं थीं। हालांकि कुछ दिनों से वहां काफी ढ़ील दी गई हैं। स्कूल कालेज खुल चुके हैं। लेकिन एहतियातन अभी भी वहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किये गए हैं। सरकार द्वारा आर्टिकल 370 और अनुच्छेद 35 A  को हटाने के फैसले का स्वागत पूरे देश ने किया था। ऐसे में  विपक्ष के नेताओं की भी जिम्मेवारी बनती है कि वो उस फैसले का सम्मान करें जिस फैसले का सम्मान पूरा देश कर रहा है। सबको पता है कि विपक्ष को भी राजनीति करनी है, उसे करनी भी चाहिए लेकिन राष्ट्रीय हित के मुद्दे पर कम से कम विपक्ष को भी साथ देना चाहिए। विपक्ष को इस बात की चिंता नहीं है कि जम्मू कश्मीर में किसे क्या दिक्कत है, उसे तो बस वहां जाकर यही दिखाना है कि वो भी शांत नहीं है या यूँ कहिये कि विपक्ष वहां जाकर सिर्फ और सिर्फ लोगों को बरगलाना चाहता है। सरकार के जिस निर्णय पर आज पूरे देश में चर्चा हो रही है, पाकिस्तान पूरी तरह बौखलाया हुआ है, ऐसे में विपक्ष को वहां जाकर पाकिस्तान को कुछ बोलने का मौका देना कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। हालाँकि शनिवार को जब विपक्ष के नेता वहां पहुँच गए तो उन्हें प्यार मोहब्बत से समझाना चाहिए था। खासकर वहां पर सुरक्षाकर्मियों ने मिडिया के साथ जो व्यवहार किया, उसे नहीं होने देना चाहिए था। अगर मिडियाकर्मी विपक्ष के नेताओं से कुछ बात कर भी लेते तो क्या फर्क पड़ने वाला था। 370 और 35 A  हटने के बाद जम्मू कश्मीर में अभी कुछ दिनों तक माहौल ऐसा ही रहने वाला है। वहां की स्तिथि में सुधार धीरे–धीरे ही होगा, लिहाजा राष्ट्र हित में देश के किसी भी दल के नेता और किसी भी मिडिया कर्मी को वहां जाने से बचना चाहिए। साथ ही साथ सरकार की मदद करनी चाहिए। राजनीति करनी भी है तो देश में अभी भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर राजनीति हो सकती है। लेकिन जम्मू कश्मीर पर राजनीति करने से बचना होगा।