त्रेतायुगी राम के कलयुगी वंशज ?

त्रेतायुगी राम के कलयुगी वंशज ?

अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। जबसे अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद चल रहा है, तबसे ऐसा पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सप्ताह में पांच बार हो रही है। दोनों पक्षों की दलीलें सुप्रीम कोर्ट में सुनी जा रही हैं। लेकिन इस बीच राम के वंशज बनने की होड़ लग गई। शुरुवात जयपुर से हुई थी। वहां की पूर्व राजकुमारी दिया सिंह ने यह कहकर सबको चौंका दिया था कि उनका परिवार राम के छोटे पुत्र कुश का वंशज है। हालांकि उसके बाद राजस्थान के ही कई राजघराने अपने आपको राम का वंशज बताने लगे। लेकिन सबसे चौंकाने वाला ब्यान आया है भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत का। अब उन्होंने दावा किया है उनका परिवार राम का वंशज है। यानी जिस राम के प्रति देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्थाएं जुड़ी हैं, उस राम पर भी कुछ लोगों ने दावेदारी कर उन्हें सीमित करने की नाकामयाब कोशिश करनी शुरू कर दी है।

देश के धार्मिक विद्वानों और उपलब्ध पुस्तकों के आधार पर श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। चार युग सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग होते हैं। ऐसा माना जाता है कि सतयुग की आयु 17 लाख 28 हजार वर्ष होती है। त्रेता की आयु 12 लाख 96 हजार , द्वापर की आयु 8 लाख 64 हजार जबकि कलयुग की उम्र 4 लाख 32 हजार वर्ष होती है। अभी कलयुग चल रहा है। कलयुग के कितने वर्ष हो चुके हैं इसे एक बार भूल जाते हैं। त्रेता युग के 12 लाख 96 हजार को भी भूल जाते हैं। सिर्फ द्वापर की बात करते हैं तो इतना तो तय है कि भगवान् राम का जन्म कम से कम 8 लाख 64 हजार साल पहले हुआ था। हिन्दू धर्म के अनुयायिओं का मानना है कि जब भी किसी युग की समाप्ति होती है तो प्रकृति में उथलपुथल होती है। धरती में भी बहूत बदलाव होते हैं। ऐसे में आज से लगभग नौ लाख साल पहले के रिकार्ड की वास्तविकता का पता लगाना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है। आम तौर पर आजकल किसी भी व्यक्ति को अपने ही पूर्वजों की आठ नौ या दस पीढ़ियों के नामों के अलावा ज्यादा याद नहीं रहता। ऐसे में किसी का यह कहना कि उनका वंशज लव और कुश का वंशज है, हास्यस्पद ही लगता है।

कभी पद्मावती फिल्म का विरोध करने वाली करणी सेना ने अपने आप को श्री राम के बड़े पुत्र लव का वंशज बताया है। जयपुर की पूर्व राजकुमारी दीया सिंह का कहना है कि उनका परिवार श्री राम के छोटे पुत्र कुश का वंशज है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं। करणी सेना की दलील कुछ जयादा बड़ी है। उनका कहना है कि भगवान् श्री राम सिसोदिया राजपूत थे जबकि करणी सेना के लोग भी सिसोदिया हैं। जिस घर में दस बीस पूर्वजों के इतिहास और उनके दस्तावेज आसानी से नहीं मिलते वहां दिया कुमारी का यह कहना कि उनके राजघराने के पास ऐसे दस्तावेज हैं जो यह साबित करते हैं कि उनका खानदान कुश का वंशज है। अब दिया कुमारी के पास ऐसी कौन सी आलमारी है, जिसमे लगभग 9 लाख साल पुराने कागजात या सबूत सुरक्षित हैं ? राजस्थान के ही मेवाड़ राज घराने के महेंद्र सिंह ने दावा किया है कि उनका खानदान लव का वंशज है।

राजस्थान के सभी लोग चाहे वो किसी भी राजघराने के हों उनके दावे को अगर हम गलत नहीं कर सकते तो उनके दावे को सही मानने का कोई ठोस आधार भी नहीं है। रही बात राम के वंशज होने का दावा करना, तो आज स्थिति यह है कि कई लोगों ने अब इसे मजाक भी बना दिया है।  सोसल मिडिया पर बहूत सी ऐसी बातें लिखीं जा रही हैं जो राम के अनुयायिओं को आहत करती होंगी। कुछ लोग अब यह कहने लगे हैं कि मेरे दादा के सर नेम में राम है, मेरे दादा के पिता के सर नेम में राम है लिहाजा उनका खानदान राम का वंशज है। इस बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने दावा किया है कि उनका खानदान भी राम का वंशज है। यानि जिस राम के नाम पर आज देश के करोड़ों लोगों की  भावनाएं जुड़ीं हैं। राम को देश के करोड़ों लोग अपना भगवान् मानते हैं।  राम चरित मानस में जिस राम को तुलसीदास ने पुरुषोतम कहा है, आज देश के ही कई लोग अपने आपको उनका वंशज बताने पर आमादा हैं।  हिन्दू धर्म को मानने वाले भी कई लोग आज उसी श्री राम का मजाक बना रहें हैं। राम पैदा हुए थे, नहीं हुए थे। इस पर कोई बहस नहीं है। बहस सिर्फ इस उस युग से है। जिस युग यानी त्रेता युग में जब वो पैदा हुए थे। उस युग की अवधी को लेकर है। उस युग की अवधि के बाद द्वापर युग आया, जिसकी अवधि लगभग नौ लाख बताई गई है। ऐसे में सिर्फ और सिर्फ सवाल यह है कि क्या इतने वर्षों का रिकार्ड किसी के पास होना संभव है। हमारे देश के ही धार्मिक विद्वानों ने कहा है कि ईश्वर विश्वास की चीज है। बहूत लोग उस राम को नहीं मानते, जो राजा दशरथ के पुत्र थे। इसके सबसे उदाहरण संत कबीर हैं। उन्होंने हमेशा उस राम की बात की जो निराकार है। हमारे देश मे निराकार और साकार दोनों को मानने वाले संत पैदा हुए, और दोनों प्रकार के संतों ने भगवान के अस्तित्व के पुष्टि की। तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में लिखा है कि हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता। यानि राम के प्रति जिनकी आस्था है उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि राम कहाँ पैदा हुए। तुलसीदास ने जब भगवान श्री राम को अनंत कह दिया तो फिर बहस की गुंजाइश बचती ही नहीं है। लिहाजा जिन्हें राम को मानना है वो उन्हें माने, जिन्हें नहीं मानना है मत माने लेकिन उनका मजाक उड़ाया जाना शायद किसी को अच्छा लगे। देश के करोड़ों लोगों को  बस इतना पता है कि 'कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उताराहि पारा ।