क्या अब 'तोता' नहीं है सीबीआई?

क्या अब 'तोता' नहीं है सीबीआई?

पूर्व वित्त और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए वो भागेभागे फिर रहे हैं। इतने बड़े लोकतान्त्रिक देश के एक पूर्व कदावर मंत्री का सी बी आई और प्रवर्तन निदेशालय के डर से यूँ भागना लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। लोग अपनेअपने हिसाब से इस घटनाक्रम का मूल्यांकन कर रहे हैं। कुछ लोग इसे बदले की भावना से की जा रही कार्यवाई बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि कथित तौर पर भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ ऐसी ही कार्यवाई होनी चाहिए। जो सी बी आई कुछ वर्षों पहले आज के गृहमंत्री अमित शाह के पीछे वैसे ही पीछे पड़ी थी जैसे कि आज पी चिदम्बरम के पीछे पड़ी है। ऐसे में देश के लोग यह जरुर जानना चाहेंगे कि यह कार्यवाई सही मायनों में पी चिदम्बरम के खिलाफ उनकी गलतियों के लिए हो रही है या फिर बदले की भावना के साथ उन्हें परेशान किया जा रहा है।

आज जिस मामले में पी चिदंबरम को गिरफ्तार करने की बात की जा रही है, वो मामला 2007 का है। उस समय आई एन एक्स मिडिया ग्रुप को विदेश से 305 करोड़ मिले थे। भारत के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड यानी FIPB ने उसकी अनुमति दी थी। उस समय पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे। जानकारी यह थी कि पी चिदंबरम के बेटे कीर्ति चिदंबरम उस मिडिया हाउस के सर्वेसर्वे थे। विदेश से आये उस धन में काफी अनियमितता का आरोप लगा था। पी चिदंबरम और उनके बेटे पर भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग के आरोप लगे थे। सी बी आई ने 2018 में केस दर्ज कर उसकी जांच शुरू की थी। कुछ माह पहले दिल्ली हाई कोर्ट से पी चिदंबरम को राहत मिल गई थी। लेकिन अब उसी दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को नामंजूर कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सी बी आई उनके घर के बाहर डेरा डाले हुए है। देश के राजनेताओं के भ्रष्टाचार की ख़बरें लगातार आती रहती हैं लेकिन कार्यवाई के नाम पर उनके खिलाफ सिर्फ अदालतों में केस चलने के ही मामले सामने आते हैं। गिनती के ही नेता हैं जिन पर सही मायनों में कार्यवाई होती है या फिर वो जेल जाते हैं। ऐसे में देश के लोगों के बीच एक आम चर्चा होती रहती है कि नेताओं पर तो आरोप लगते ही रहते हैं। उन पर कार्यवाई तो होती नहीं। कुछ लोग ये भी कहते हैं कि उन्हें कौन जेल भेजेगा। लेकिन जबसे लालू प्रसाद यादव जेल की सलाखों के पीछे गए तबसे यह माना जाने लगा कि अब शायद हर वो नेता जेल की सलाखों के पीछे होगा जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप है या जिस पर अन्य संगीन आरोप हैं। हालांकि आज भी देश में कई दर्जन ऐसे नेता हैं जिन पर लूट, हत्या और अन्य मामलों में मुक़दमे दर्ज हैं बावजूद इसके वो बड़े आराम से रह रहे हैं। जिन नेताओं पर आरोप है उनकी गिरफ़्तारी से देश के लोग शायद खुश होंगे, लेकिन सिर्फ कुछ नेताओं की गिरफ्तारी से उनके जेहन में एक संदेह भी पैदा होगा कि कहीं यह कार्यवाई बदले की भावना से तो नहीं की जा रही है। यहाँ बता दें कि 2010 में जब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे तो उसी समय सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले ने तूल पकड़ा था। सी बी आई अमित शाह के पीछे हाथ धोकर पड़ी थी। पी चिदंबरम उस समय देश के गृहमंत्री थे। 25 जुलाई 2010 को अमित शाह को सी बी आई ने गिरफ्तार किया था। वो तीन माह तक जेल में रहे। जमानत मिलने के बाद भी उन्हें कई महीनों तक गुजरात के बाहर रहना पड़ा था। आज परिस्थितियां बदली हुई हैं। अमित शाह देश के गृहमंत्री हैं जबकि पी चिदंबरम पूर्व गृहमंत्री रहे हैं। जो सी बी आई आज चिदंबरम के पीछे पड़ी है उस पर कभी सुप्रीम कोर्ट ने पिजड़े का तोता बताकर तल्ख़ टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सीधा मतलब था कि राजनेताओं ने सी बी आई को वैसा बना दिया है जैसे वो पिजड़े में बंद तोता हो। उस समय कांग्रेस नेत्रित्व वाली यूपीए सरकार पर सी बी आई का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। आज संभव है कि विपक्षी दल वर्तमान सरकार पर वही आरोप लगाए। बल्कि यूँ कहिये विपक्षियों ने आरोप लगाने शुरू कर दिए है। जिस सरकारी और स्वतंत्र एजेंसियों पर देश को भरोसा करनी चाहिए आज उन्ही जाँच एजेंसियों को लोग शक की नजर से देखने लगे हैं। अब ऐसे में यह तय करना बहूत जरुरी है कि इन एजेंसियों का अपने फायदे और विपक्षियों को सबक सिखाने की शुरुवात किसने की थी। अमित शाह पर आज आरोप शायद इसलिए लग सकता है कि जब उन पर सी बी आई ने शिकंजा कसा था तब पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे। लोग शायद यह भी कहें कि अमित शाह आज पुराना बदल लें रहें हों। लेकिन यह संजोग भी हो सकता है। हो सकता है कि पी चिदम्बरम पर लगे आरोप ऐसे हों कि उन पर कार्यवाई करना जरुरी हो गया हो। पी चिदंबरम पर कार्यवाई कर जांच एजेंसियों ने देश को बता दिया है कि वो किसी भी आरोपी को बख्शने वाले नहीं हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार भी देश की जनता को यह बताने में सफल हो कि यह कार्यवाई न तो बदले की भावना से की जा रही है और न ही अब कोई आरोपी नेता बच पायेगा। चाहे वो किसी पार्टी का कितना ही बड़ा नेता हो।